अब तक भुगतान से संबंधित मामलों को शासन स्तर तक भेजना पड़ता था, जिससे फाइलें महीनों अटकी रहती थीं। इस जटिल व्यवस्था के कारण न सिर्फ कर्मचारियों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था, बल्कि कई बार न्यायालय के आदेश भी समय पर लागू नहीं हो पाते थे। शासन स्तर पर हुई समीक्षा में यह बात सामने आई कि यही देरी अवमानना मामलों का कारण भी बन रही थी।
इन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने नई प्रणाली लागू की है। इसके तहत बकाया भुगतान और अनुमन्यता का अधिकार अब धनराशि के अनुसार अलग-अलग विभागीय अधिकारियों को सौंप दिया गया है, जिससे निर्णय स्थानीय स्तर पर ही लिए जा सकें।
नई व्यवस्था में दो लाख रुपये तक के भुगतान की स्वीकृति जिला विद्यालय निरीक्षक स्तर से दी जाएगी। दो से चार लाख रुपये तक के मामलों में मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक सक्षम होंगे। वहीं चार से आठ लाख रुपये तक के अवशेष भुगतान के लिए अपर शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), प्रयागराज को अधिकार दिया गया है। आठ लाख रुपये से अधिक की धनराशि के मामलों में शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), प्रयागराज की अनुमति के बाद शिक्षा निदेशालय से आदेश जारी किए जाएंगे।
शासन ने शिक्षा निदेशक को यह भी निर्देश दिए हैं कि इस संशोधित व्यवस्था की जानकारी सभी मंडलीय और जिला स्तर के अधिकारियों तक पहुंचाई जाए, ताकि इसका लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके। इस फैसले पर उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने संतोष जताया है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र सिंह पटेल और प्रवक्ता ओम प्रकाश त्रिपाठी का कहना है कि यदि सक्षम अधिकारियों को स्वीकृति के साथ धन आवंटन का अधिकार भी दिया जाए, तो शिक्षकों और कर्मचारियों को बकाया भुगतान के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
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