नई प्रक्रिया के तहत, अब हर निजी स्कूल की मान्यता के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित की जाएगी। यह कदम विशेष रूप से नि:शुल्क और अनिवार्य बाल अधिकार अधिनियम को सुदृढ़ करने के लिए उठाया गया है।
प्राथमिक कक्षाओं के लिए शिक्षक और छात्र अनुपात
नई एसओपी में पहली से पांचवीं कक्षा तक के स्कूलों के लिए शिक्षक और छात्र संख्या का स्पष्ट निर्धारण किया गया है। इसके अनुसार:
60 बच्चों तक: 2 शिक्षक अनिवार्य
61 से 90 बच्चों तक: 3 शिक्षक
91 से 120 बच्चों तक: 4 शिक्षक
121 से 200 बच्चों तक: 5 शिक्षक
150 बच्चों तक: 5 शिक्षक + 1 प्रधानाध्यापक
200 से अधिक बच्चों पर छात्र-शिक्षक अनुपात (प्रधानाध्यापक को छोड़कर) 40 से अधिक नहीं होना चाहिए
कक्षा 6 से 8 के लिए शिक्षक नियम
छठी से आठवीं कक्षा तक के लिए भी शिक्षक संख्या और विषयों के लिए नियम तय किए गए हैं:
कम से कम एक शिक्षक प्रति कक्षा अनिवार्य
गणित, विज्ञान, सामाजिक अध्ययन और भाषा जैसे विषय पढ़ाने के लिए पर्याप्त शिक्षक होना चाहिए
प्रत्येक 35 बच्चों पर कम से कम एक शिक्षक होना जरूरी
100 से अधिक छात्रों वाले स्कूल में पूर्णकालिक प्रधानाध्यापक अनिवार्य
कला, स्वास्थ्य एवं शारीरिक शिक्षा और कार्य शिक्षा के लिए अंशकालिक शिक्षक अनिवार्य
शिक्षण समय और कार्य दिवस
शिक्षण समय और कार्य दिवसों के नियम भी स्पष्ट किए गए हैं:
कक्षा 1 से 5: 200 कार्य दिवस, 800 शिक्षण घंटे
कक्षा 6 से 8: 220 कार्य दिवस, 1000 शिक्षण घंटे
प्रत्येक शिक्षक के लिए सप्ताह में 45 शिक्षण घंटे अनिवार्य।
स्कूल सुविधाओं और बच्चों की सुरक्षा
नई एसओपी में स्कूल की भौतिक और सुविधाओं से संबंधित नियम भी स्पष्ट किए गए हैं। स्कूल तक बच्चों की पहुँच में कोई बाधा नहीं होनी चाहिए, लड़के और लड़कियों के लिए अलग शौचालय, पेयजल सुविधा और दोपहर का भोजन पकाने के लिए रसोई, खेल का मैदान और चहारदीवारी होना अनिवार्य।

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