केंद्रीय कर्मचारियों के पेंशन पर बड़ा अपडेट! पढ़ें डिटेल्स!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों में लगातार असंतोष देखने को मिल रहा है। सरकार ने इसे एनपीएस (नेशनल पेंशन सिस्टम) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में पेश किया था, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है।

आंकड़े जो सरकार के लिए चिंता का विषय

पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) द्वारा आरटीआई के तहत दी गई ताजा जानकारी चौंकाने वाली है। केंद्र सरकार के अंतर्गत जनवरी 2025 तक लगभग 26.46 लाख कर्मचारी एनपीएस में शामिल हैं, लेकिन इनमें से केवल करीब 1.03 लाख सेवारत कर्मचारियों ने ही यूपीएस का विकल्प चुना है। यानी कुल संख्या का चार प्रतिशत से भी कम।

तीन बार मौका, फिर भी नहीं बदला रुख

सरकार ने कर्मचारियों को यूपीएस में शामिल होने के लिए तीन बार समय-सीमा बढ़ाई—पहले जून, फिर सितंबर और आखिर में नवंबर तक। इसके बावजूद कर्मचारियों का रुख नहीं बदला। यह साफ संकेत है कि समस्या समय की नहीं, विश्वास की है।

कर्मचारियों की एक ही मांग: ओपीएस

कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यूपीएस, एनपीएस का ही एक संशोधित रूप है, जबकि उनकी मांग बिल्कुल स्पष्ट है—गैर-अंशदायी, सुनिश्चित और कानूनी रूप से संरक्षित पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ समेत कई संगठनों का मानना है कि अंशदायी पेंशन मॉडल रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। यही वजह है कि कर्मचारी किसी भी “वैकल्पिक मॉडल” को अपनाने से हिचक रहे हैं।

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