न अमेरिका का F-35, न रूस का SU-57! भारत की पसंद बन रहा है F5 सुपर राफेल

नई दिल्ली। भारत अपने वायुसेना बेड़े को मजबूत करने के लिए एक बड़ा रणनीतिक फैसला लेने की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत ने अमेरिका के एफ-35 स्टील्थ फाइटर और रूस के सुखोई-57 से दूरी बनाते हुए फ्रांस के राफेल लड़ाकू विमान पर भरोसा जताया है। संभावना है कि भारत 100 से अधिक राफेल जेट खरीदे, जिनमें कुछ अत्याधुनिक राफेल F5 “सुपर राफेल” भी शामिल हो सकते हैं।

अमेरिकी डिफेंस मैगजीन 19fortyfive की रिपोर्ट के अनुसार, राफेल F5 भारत की जरूरतों के लिहाज से एक संतुलित और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभर रहा है। इसमें नया M88 T-REX इंजन लगाया जाएगा, जो मौजूदा इंजन की तुलना में करीब 20 प्रतिशत ज्यादा थ्रस्ट पैदा करता है। खास बात यह है कि बिना स्टील्थ फाइटर जैसे भारी मेंटिनेंस खर्च के यह विमान 4.5 जेनरेशन की एडवांस क्षमताएं देता है।

क्यों अहम है राफेल F5

हालांकि चीन के पास J-20 और J-35 जैसे पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान हैं और वह छठी पीढ़ी पर भी काम कर रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में भारत के लिए राफेल एक व्यावहारिक समाधान माना जा रहा है। एफ-35 की उपलब्धता और रणनीतिक शर्तें भारत के लिए चुनौती हैं, वहीं सुखोई-57 की क्षमताओं को लेकर भरोसे की कमी बताई जाती है। रिपोर्ट्स में यह भी संकेत मिले हैं कि भारत सीमित संख्या में राफेल F5 और शेष राफेल F4 संस्करण खरीदेगा, जिनका बड़ा हिस्सा मेक इन इंडिया के तहत देश में बनाया जा सकता है।

मल्टी-मिशन क्षमता में आगे

राफेल F5 को उसकी ओम्निरोल क्षमता के लिए जाना जाता है। यह एक ही उड़ान में एयर-टू-एयर, एयर-टू-ग्राउंड और जासूसी जैसे कई मिशन अंजाम दे सकता है। इसमें AESA रडार, एडवांस इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और जबरदस्त फुर्ती है। यह विमान मेटियोर, माइका, स्कैल्प क्रूज मिसाइल, एक्सोसेट एंटी-शिप मिसाइल जैसे आधुनिक हथियारों से लैस हो सकता है और 20,000 पाउंड से अधिक का हथियार भार उठाने में सक्षम है।

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