बिहार में छात्रों को खुशखबरी, MBBS की सीटें बढ़ सकती हैं?

पटना। बिहार के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटों में बढ़ोतरी की दिशा में बड़ी पहल की जा रही है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए तैयारियाँ शुरू कर दी हैं। इस पहल का उद्देश्य बिहार में डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाना है।

बता दें की राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में सीट बढ़ाने की प्रक्रिया पर काम चल रहा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने सीट वृद्धि के लिए आवेदन पोर्टल खोला हुआ है, और इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी मेडिकल कॉलेजों को प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह ने सभी मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों से कहा है कि प्रत्येक कॉलेज एमबीबीएस की 30 अतिरिक्त सीटों के लिए प्रस्ताव भेजे। उनका कहना है कि इससे राज्य में मेडिकल शिक्षा का विस्तार होगा और लंबी अवधि में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा।

कई कॉलेजों में सीटें 150 तक बढ़ सकती हैं

यदि सभी प्रस्तावों को मंजूरी मिल जाती है, तो बिहार के कई मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें 150 तक पहुंच सकती हैं। इन कॉलेजों में शामिल हैं: एसकेएमसीएच, मुजफ्फरपुर, दरभंगा मेडिकल कॉलेज, गया मेडिकल कॉलेज, बेतिया मेडिकल कॉलेज, अनुग्रह नारायण मेडिकल कॉलेज, गया, भगवान महावीर मेडिकल कॉलेज, पावापुरी, भागलपुर मेडिकल कॉलेज।

वहीं, पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में सीटों की संख्या 230 तक बढ़ने की संभावना है। इसके अलावा, पटना एम्स में 145, पूर्णिया मेडिकल कॉलेज में 130 और आईजीआईएमएस, पटना में 180 सीटों तक वृद्धि संभव है।

बिहार में पिछली बार भी बढ़ी थीं पीजी सीटें

बिहार के मेडिकल कॉलेजों में हाल ही में स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों में भी वृद्धि की गई थी। एसकेएमसीएच में सर्जरी, गायनी और पीडियाट्रिक्स विभाग में कुल 11 पीजी सीटें बढ़ाई गईं, जिसमें पीडियाट्रिक्स विभाग में पहली बार एमडी की पढ़ाई शुरू हुई। अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी पीजी सीटों की संख्या बढ़ाई गई, जिससे छात्रों को उच्च शिक्षा के अवसर बढ़े।

फैकल्टी और तकनीकी स्टाफ में भी बढ़ोतरी

स्वास्थ्य विभाग ने मेडिकल कॉलेजों में सीट वृद्धि के दौरान सहायक प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक और प्राध्यापकों की नियुक्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिया है। इसके साथ ही तकनीकी स्टाफ की कमी को भी पूरा किया जाएगा, ताकि नए छात्रों के लिए संसाधनों की कोई कमी न हो।

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