केंद्र सरकार के 5 बड़े फैसला, LPG सिलेंडर को लेकर बड़ी खुशखबरी

नई दिल्ली। देश में औद्योगिक गतिविधियों को सुचारु बनाए रखने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक अहम निर्णय लिया है। हाल ही में जारी निर्देशों के तहत कॉमर्शियल LPG सिलेंडरों का आवंटन 50% से बढ़ाकर 70% कर दिया गया है। यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब वैश्विक हालात के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बना हुआ है।

आपको बता दें की मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने सभी राज्यों को निर्देश भेजते हुए इस बढ़े हुए कोटे को लागू करने को कहा है। सरकार का उद्देश्य साफ है, देश के प्रमुख उद्योगों की उत्पादन क्षमता को किसी भी हाल में प्रभावित नहीं होने देना।

1 .इन 6 बड़े सेक्टर्स को मिलेगी प्राथमिकता

सरकार ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त LPG का फायदा सबसे पहले उन क्षेत्रों को मिलेगा जो अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं और जहां बड़ी संख्या में श्रमिक कार्यरत हैं। इनमें स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल, डाइज, केमिकल्स और प्लास्टिक्स जैसे सेक्टर्स शामिल हैं। इन उद्योगों में उत्पादन रुकने का सीधा असर बाजार और रोजगार दोनों पर पड़ता है।

2 .PNG की ओर बढ़ने की शर्त

इस राहत के साथ सरकार ने एक रणनीतिक शर्त भी जोड़ी है। जिन उद्योगों को अतिरिक्त 20% LPG कोटे का लाभ लेना है, उन्हें तेल कंपनियों में पंजीकरण कराना होगा। साथ ही, उन्हें पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन के लिए आवेदन करना अनिवार्य होगा। दरअसल, सरकार चाहती है कि उद्योग धीरे-धीरे LPG से हटकर PNG जैसे अधिक स्थिर और सुरक्षित विकल्प की ओर बढ़ें, जिससे भविष्य में सप्लाई से जुड़ी समस्याओं से बचा जा सके।

3 .विशेष उद्योगों को मिली छूट

कुछ ऐसे उद्योग भी हैं जिनकी उत्पादन प्रक्रिया में विशेष प्रकार की हीटिंग की जरूरत होती है, जो PNG से पूरी नहीं हो सकती। ऐसे ‘प्रोसेस इंडस्ट्री’ को इस शर्त से छूट दी गई है और वे बिना किसी अतिरिक्त नियम के 70% LPG कोटे का लाभ लेते रहेंगे।

4 .MSME सेक्टर को फायदा

इस फैसले का सबसे बड़ा लाभ छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) को मिलने की उम्मीद है, जो पूरी तरह LPG पर निर्भर हैं। कोटे में 20% की बढ़ोतरी उनके लिए राहत का काम करेगी और उत्पादन में आने वाली रुकावटों को कम करेगी।

5 .सप्लाई चेन होगी मजबूत

वैश्विक ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता के बीच यह फैसला सप्लाई चेन को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे बाजार में जरूरी वस्तुओं की उपलब्धता बनी रहेगी और कीमतों पर भी नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है।

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