ईंधन अधिभार में बदलाव
यूपी पावर कार्पोरेशन ने अप्रैल महीने के ईंधन अधिभार शुल्क की दरें तय कर दी हैं। मार्च में यह दरें नेगेटिव थीं, जिससे उपभोक्ताओं को थोड़ी राहत मिली थी। लेकिन अब दरें धनात्मक हो गई हैं, और अप्रैल में 142 करोड़ रुपये अतिरिक्त वसूली की योजना है।
उपभोक्ता परिषद ने अधिभार शुल्क की गणना के फॉर्मूले पर सवाल उठाया है और इसकी जांच की मांग की है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा का कहना है कि बिजली कंपनियों पर उपभोक्ताओं का कुल बकाया 51,000 करोड़ रुपये है, इसलिए पहले इसे समायोजित किया जाना चाहिए, न कि उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि वसूली जाए।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली से परेशानी
यूपी में कई घरों और कार्यालयों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। इन मीटरों से उपभोक्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बिल माइनस में आते ही बिजली कट जाती है, और भुगतान के बावजूद बिजली तुरंत चालू नहीं होती।
इसकी वजह है कि सर्वर या डेटा अपडेट में देरी के कारण भुगतान की सूचना मुख्यालय तक समय पर नहीं पहुंच रही। उपभोक्ताओं को बिजली बहाल करने के लिए कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। अधिकारी समय पर बिजली बहाल करने की प्रक्रिया में देरी के लिए केवल उपभोक्ताओं को आश्वासन देते हैं।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है बड़ा सुझाव?
अप्रैल महीने के बिल में बढ़ोतरी को ध्यान में रखते हुए बजट योजना बनाएं।
बिलिंग और अधिभार से जुड़ी शिकायतें तुरंत राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद में दर्ज कराएं।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर में समस्या होने पर ऑनलाइन शिकायत पोर्टल या नजदीकी बिजली कार्यालय का उपयोग करें।

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