कोयला बन सकता है नया कुकिंग फ्यूल विकल्प
राज्य सरकार की योजना के अनुसार, अब खाना पकाने के लिए कोयले को एक वैकल्पिक ईंधन के रूप में बढ़ावा दिया जा सकता है। यह फैसला खासकर उन ग्रामीण और गरीब परिवारों को ध्यान में रखकर लिया गया है, जो एलपीजी की बढ़ती कीमतों और कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। सुबह की चाय से लेकर भोजन तक, रोजमर्रा की जरूरतों में इसका असर देखने को मिल सकता है।
राशन प्रणाली के जरिए होगी आपूर्ति
सरकार की योजना है कि इस व्यवस्था को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) से जोड़ा जाए। इसके तहत राज्य के करीब 2 करोड़ राशन कार्ड धारकों को इसका लाभ मिल सकता है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभार्थियों को इसमें प्राथमिकता दी जाएगी। इस कदम का उद्देश्य है कि जरूरतमंद परिवारों तक सस्ता और आसानी से उपलब्ध ईंधन पहुंच सके।
वैश्विक संकट का असर
बताया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं का असर एलपीजी उपलब्धता पर पड़ा है। इसी वजह से सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था की ओर ध्यान देना पड़ा है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिवार को ईंधन की कमी का सामना न करना पड़े।
कालाबाजारी पर नियंत्रण
कोयले की मांग बढ़ने के साथ ही इसके दामों में अस्थिरता और कालाबाजारी की शिकायतें भी सामने आई हैं। सरकार का मानना है कि यदि इसे PDS के माध्यम से वितरित किया जाएगा, तो कीमतों पर नियंत्रण रहेगा और बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी।
प्रस्तावित वितरण योजना
प्रस्ताव के अनुसार, हर राशन कार्ड धारक को हर महीने लगभग 100 किलो तक कोयला उपलब्ध कराया जा सकता है। इसके लिए राज्य खनन निगम और जिला स्तर के आपूर्ति तंत्र को जिम्मेदारी दी जाएगी।
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