1. जीपीएस तकनीक से होगा सटीक गन्ना सर्वे
नई सर्वे नीति के तहत गन्ना फसल की पूरी जांच जीपीएस तकनीक से की जाएगी। यह सर्वे 1 मई 2026 से शुरू होकर 30 जून 2026 तक चलेगा। इसके लिए एक विशेष टीम बनाई जाएगी, जिसमें गन्ना पर्यवेक्षक और चीनी मिल का कर्मचारी शामिल रहेगा। टीम खेतों पर पहुंचकर किसान की मौजूदगी में फसल का डेटा सीधे ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज करेगी। इससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
2. किसानों को पहले से मिलेगी जानकारी
सर्वे शुरू होने से तीन दिन पहले सभी पंजीकृत किसानों को मोबाइल पर एसएमएस भेजकर सूचना दी जाएगी। इससे किसान समय पर अपने खेत में मौजूद रह सकेंगे और सर्वे प्रक्रिया में भाग ले सकेंगे। सर्वे पूरा होने के बाद किसानों को उनके खेत का क्षेत्रफल, गन्ने की किस्म और अन्य जरूरी जानकारी भी एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी।
3. नए किसानों का पंजीकरण भी होगा आसान
इस सर्वे अभियान के दौरान नए गन्ना किसानों का पंजीकरण भी किया जाएगा। सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि जो किसान पहली बार गन्ना उत्पादन से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें भी इस प्रक्रिया में शामिल किया जाए। इसके अलावा 30 सितंबर 2026 तक पंजीकृत किसानों को ही गन्ना आपूर्ति का लाभ मिलेगा, जिससे सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहेगी।
4. ऑनलाइन सत्यापन और डिजिटल रिकॉर्ड की सुविधा
किसानों की भूमि और सर्वे डेटा का सत्यापन अब ऑनलाइन किया जा सकेगा। इसके लिए सरकार ने राजस्व विभाग की वेबसाइट का उपयोग करने की सुविधा दी है, जहां किसान अपनी भूमि से जुड़ी जानकारी देख सकते हैं। इसके साथ ही चीनी मिलें भी सर्वे के अंतिम आंकड़े सीधे विभागीय पोर्टल पर अपलोड करेंगी, जिससे पूरा रिकॉर्ड डिजिटल और सार्वजनिक रहेगा।
.png)
0 comments:
Post a Comment