CM सम्राट चौधरी के 5 बड़े फैसले, कर्मचारियों में मचा हड़कंप

पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। सम्राट चौधरी के नेतृत्व में राज्य सरकार अब सरकारी दफ्तरों की कार्यशैली में सुधार को प्राथमिकता दे रही है। इसी कड़ी में कर्मचारियों की समयपालन और कार्यनिष्ठा को लेकर कड़े निर्देश जारी किए गए हैं।

1 .समय पर उपस्थिति को लेकर सख्ती

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी विभागों और जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि सरकारी कर्मचारी समय पर कार्यालय पहुंचें और निर्धारित समय तक अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करें। पत्र में यह भी कहा गया है कि कई मामलों में कर्मचारी देर से आते हैं या समय से पहले कार्यालय छोड़ देते हैं, जो प्रशासनिक अनुशासन के खिलाफ है।

2 .ड्यूटी में लापरवाही पर कार्रवाई

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि केवल उपस्थित रहना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कार्य के प्रति गंभीरता और जिम्मेदारी भी जरूरी है। कुछ मामलों में यह पाया गया है कि कर्मचारी कार्यालय में मौजूद रहते हुए भी अपने कर्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

3 .कार्यालय समय का सख्ती से पालन

राज्य में सचिवालय और उससे जुड़े कार्यालयों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, जहां सुबह 9:30 बजे से शाम तक काम का समय तय है। वहीं क्षेत्रीय कार्यालयों में छह दिन का कार्य सप्ताह लागू है, जिसमें सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम होता है। सरकार ने निर्देश दिया है कि इन समय-सारिणी का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए।

4 .बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य

सरकारी कार्यालयों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली पहले से लागू है, लेकिन अब इसमें किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभागों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि कर्मचारी नियमित रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज करें।

5 .देरी पर वेतन कटौती का प्रावधान

सरकार ने साफ कर दिया है कि यदि कोई कर्मचारी लगातार देर से आता है, तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई होगी। इसमें छुट्टी काटने से लेकर वेतन कटौती तक शामिल है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों में छूट का प्रावधान भी रखा गया है।

प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम

सरकार का मानना है कि इन सख्त निर्देशों से सरकारी दफ्तरों की कार्यक्षमता में सुधार होगा और आम जनता को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

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