रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाई सियासी धड़कन
अगर पिछले चुनावों से तुलना करें, तो 2021 में कुल मतदान लगभग 82 प्रतिशत के आसपास था। इस बार पहले ही चरण में इतना ऊंचा प्रतिशत यह संकेत दे रहा है कि मतदाता इस चुनाव को लेकर बेहद गंभीर हैं। इतनी बड़ी भागीदारी अक्सर किसी बड़े बदलाव या मजबूत समर्थन की ओर इशारा करती है।
क्या है जनता का मूड?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब वोटिंग प्रतिशत अचानक बढ़ता है, तो इसके पीछे या तो सत्ता के खिलाफ नाराजगी होती है या फिर सरकार के समर्थन में मजबूत लामबंदी। इस बार बंगाल में दोनों ही संभावनाएं खुली नजर आ रही हैं।
ममता बनर्जी vs नरेंद्र मोदी: किसकी बढ़त?
एक ओर सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस है, जो अपनी योजनाओं और संगठन के दम पर आत्मविश्वास से भरी हुई है। ममता बनर्जी की सरकार को भरोसा है कि ग्रामीण क्षेत्रों, महिलाओं और अल्पसंख्यक वर्ग का समर्थन उन्हें फिर से मजबूत स्थिति में ला सकता है।
वहीं दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी इस बंपर वोटिंग को बदलाव की लहर मान रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी नेतृत्व का दावा है कि इस बार साइलेंट वोटर खुलकर सामने आया है, जो सत्ता परिवर्तन का संकेत दे सकता है।

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