रजिस्ट्री से पहले मिलेगी पूरी जानकारी
नई व्यवस्था के तहत अब किसी भी जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उसकी विस्तृत जांच अनिवार्य होगी। इससे खरीदार को पहले ही पता चल जाएगा कि जिस जमीन को वह खरीद रहा है, वह विवादित है या नहीं। इस कदम का उद्देश्य फर्जीवाड़े और विवादित जमीन के सौदों पर रोक लगाना है।
10 दिनों में होगी जमीन की पूरी जांच
आवेदन मिलने के बाद संबंधित अंचल के अधिकारी सीओ और राजस्व कर्मचारी 10 दिनों के भीतर जमीन की जांच कर अपनी रिपोर्ट देंगे। इस प्रक्रिया से रजिस्ट्री से पहले ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और भविष्य में कानूनी विवादों की संभावना कम होगी।
13 जरूरी जानकारियां देना अनिवार्य
नई प्रणाली में आवेदक को जमीन से जुड़ी 13 महत्वपूर्ण जानकारियां देनी होंगी। इसमें खाता, खेसरा, थाना, मौजा, रकबा, चौहद्दी और रैयत का नाम जैसी डिटेल शामिल हैं। इन्हीं आधारों पर जांच की जाएगी और रिपोर्ट तैयार होगी।
धोखाधड़ी पर लगेगी रोक
अब तक कई मामलों में बिना पूरी जांच के जमीन की खरीद-फरोख्त हो जाती थी, जिससे बाद में विवाद सामने आते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ऐसे मामलों में काफी कमी आने की उम्मीद है। खरीदार सुरक्षित तरीके से निवेश कर सकेंगे।
अधिकारियों को प्रशिक्षण
नई प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रमंडल स्तर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सीओ और राजस्व कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे नई व्यवस्था को सही तरीके से लागू कर सकें।

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