केंद्र सरकार का फैसला: NPS नियमों में बदलाव, कर्मचारियों को खुशखबरी

नई दिल्ली। केंद्र सरकार और PFRDA ने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के नियमों में बड़े बदलाव लागू किए हैं, जो वर्ष 2026 से प्रभावी होंगे। इन नए नियमों का उद्देश्य रिटायरमेंट फंड को अधिक लचीला बनाना और कर्मचारियों को निकासी में आसानी देना है। साथ ही, निवेश अवधि बढ़ाकर भविष्य की आर्थिक सुरक्षा को भी मजबूत किया गया है।

निवेश और एग्जिट नियमों में बड़ा बदलाव

नए प्रावधानों के अनुसार अब सरकारी कर्मचारियों के लिए NPS में निवेश की अवधि को बढ़ाकर 85 वर्ष तक कर दिया गया है। पहले यह सीमा 75 वर्ष थी। इसका मतलब है कि कर्मचारी अधिक समय तक निवेश जारी रखकर बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकेंगे। इसके अलावा अब 15 साल की सेवा के बाद भी सामान्य एग्जिट का विकल्प मिल जाएगा, जबकि पहले इसके लिए 60 वर्ष की उम्र अनिवार्य थी। 5 साल का अनिवार्य लॉक-इन पीरियड भी समाप्त कर दिया गया है।

कॉर्पोरेट कर्मचारियों को बड़ी राहत

प्राइवेट और कॉर्पोरेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी राहत एकमुश्त निकासी में दी गई है। अब रिटायरमेंट पर वे अपने कुल NPS फंड का 80% तक एक साथ निकाल सकेंगे, जबकि पहले यह सीमा 60% थी। शेष 20% राशि से उन्हें एन्युटी खरीदनी होगी, जिससे नियमित पेंशन मिलती रहेगी।

फंड के आधार पर निकासी के नए नियम

सरकार ने NPS निकासी को फंड के आकार के अनुसार तीन हिस्सों में बांट दिया है:

₹8 लाख तक का फंड: पूरी राशि एकमुश्त निकाली जा सकेगी।

₹8 लाख से ₹12 लाख तक: ₹6 लाख तक एकमुश्त निकासी, बाकी राशि के लिए एन्युटी या 6 साल का SUR विकल्प।

₹12 लाख से अधिक फंड: 80% राशि एन्युटी में जाएगी, केवल 20% निकाला जा सकेगा।

प्री-मैच्योर एग्जिट के नियम

अगर कोई कर्मचारी समय से पहले NPS से बाहर निकलना चाहता है तो उसे 80% राशि से एन्युटी खरीदनी होगी और केवल 20% राशि ही नकद मिल सकेगी। हालांकि, ₹5 लाख से कम फंड होने पर पूरी राशि निकालने की सुविधा जारी रहेगी।

क्या होगा फायदा?

इन नए नियमों से कर्मचारियों को एक ओर जहां ज्यादा लचीलापन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर लंबी अवधि में बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाने का अवसर भी बढ़ेगा। साथ ही, निकासी प्रक्रिया सरल होने से वित्तीय जरूरतों को पूरा करना पहले से आसान होगा।

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