सरकार का मानना है कि इन सड़कों के बनने से उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क और अधिक मजबूत होगा। इसके साथ ही ट्रैफिक जाम की समस्या कम होगी और राज्य में पर्यटन, व्यापार तथा औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।
सुल्तानगंज-भागलपुर गंगा पथ
पहली परियोजना भागलपुर क्षेत्र में प्रस्तावित है। इसके तहत सुल्तानगंज से भागलपुर तक लगभग 40.8 किलोमीटर लंबा फोरलेन गंगा पथ बनाया जाएगा। इस पर करीब 4,849.83 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इसे चार वर्षों में पूरा करने की योजना है। इस सड़क से क्षेत्रीय आवागमन आसान होगा और खासकर श्रावणी मेले के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी।
मुंगेर गंगा पथ परियोजना
दूसरी परियोजना मुंगेर जिले में विकसित की जाएगी। साफियाबाद से बरियारपुर होते हुए घोरघट तक लगभग 42 किलोमीटर लंबा फोरलेन मार्ग तैयार किया जाएगा। इस पर लगभग 5,119.8 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस परियोजना से न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि स्थानीय व्यापार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
दीघा-कोइलवर (JP गंगा पथ विस्तार)
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण परियोजना राजधानी पटना से जुड़ी है। इसके तहत जेपी गंगा पथ का विस्तार दीघा से कोइलवर (बिहटा) तक किया जाएगा, जिसकी लंबाई लगभग 35.65 किलोमीटर होगी। इस पर करीब 6,495.78 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इस विस्तार से पटना में ट्रैफिक का दबाव कम होगा और भोजपुर व बिहटा की ओर जाने वाले लोगों को तेज और सुगम यात्रा सुविधा मिलेगी।
बिहार के विकास को नई दिशा
इन तीनों गंगा पथ परियोजनाओं के पूरा होने के बाद बिहार की सड़क संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। बेहतर कनेक्टिविटी से जहां आम लोगों की यात्रा आसान होगी, वहीं राज्य में निवेश और आर्थिक गतिविधियों को भी नई ऊर्जा मिलेगी। यह परियोजना बिहार के विकास को एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

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