जानकारी के अनुसार, कई बार केंद्रांश की राशि समय पर नहीं आने के कारण वेतन भुगतान में देरी हो जाती थी। अब सरकार इस समस्या का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में काम कर रही है, ताकि शिक्षकों को आर्थिक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
छह लाख शिक्षकों को मिलेगा फायदा
राज्य में करीब छह लाख स्कूली शिक्षक विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत हैं। इनमें पंचायत, नगर निकाय और समग्र शिक्षा अभियान से जुड़े शिक्षक भी शामिल हैं। सरकार की नई योजना लागू होने के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। शिक्षा विभाग ने वित्त एवं लेखा शाखा के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसी फंड व्यवस्था तैयार करें, जिससे किसी भी परिस्थिति में वेतन भुगतान प्रभावित न हो।
वेतन भुगतान के लिए जारी हुई राशि
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षकों के वेतन भुगतान के लिए 642 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इससे पहले समग्र शिक्षा अभियान के तहत भी 1050 करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध कराई गई थी। इस धनराशि का उपयोग अप्रैल और मई महीने के वेतन भुगतान में किया जा रहा है। इससे विभिन्न श्रेणी के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को राहत मिली है।
क्यों होती थी वेतन में देरी?
शिक्षकों को वेतन भुगतान में देरी का मुख्य कारण केंद्र से मिलने वाली राशि का समय पर उपलब्ध नहीं होना माना जाता है। कई बार कुछ दिनों की देरी से शिक्षकों को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। अब शिक्षा विभाग चाहता है कि वैकल्पिक फंड व्यवस्था बनाकर इस समस्या को खत्म किया जाए, ताकि हर महीने तय समय पर वेतन जारी हो सके।

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