इस संबंध में शासन को लगातार आवेदन और मांग पत्र भेजे जा रहे हैं। इन्हीं मांगों को ध्यान में रखते हुए कई जिलों के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों से विस्तृत जानकारी मांगी गई है। इस कदम के बाद शिक्षामित्रों के बीच नई उम्मीद जगी है कि सरकार जल्द कोई सकारात्मक फैसला ले सकती है।
शासन ने शुरू की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया
शिक्षा विभाग की ओर से प्रदेश के कई जिलों से सेवा अवधि बढ़ाने से जुड़े बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी गई है। अधिकारियों को यह बताने के लिए कहा गया है कि यदि सेवा अवधि बढ़ाई जाती है तो उसका क्या प्रभाव पड़ेगा और कितने शिक्षामित्र इससे लाभान्वित होंगे। बताया जा रहा है कि जिन जिलों से जानकारी मांगी गई है उनमें लखनऊ, कानपुर, मथुरा, गोंडा, जौनपुर, बलिया, बदायूं, उन्नाव और रायबरेली सहित कई जिले शामिल हैं।
प्रदेश में लंबे समय से उठ रही है यह मांग
प्रदेश में शिक्षामित्रों की नियुक्ति करीब दो दशक पहले शुरू हुई थी। वर्षों से वे प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा देने का काम कर रहे हैं। समय-समय पर शिक्षामित्र संगठन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के सामने आवाज उठाते रहे हैं। हाल ही में सरकार ने उनका मानदेय बढ़ाकर राहत दी थी। इसके बाद अब सेवा अवधि में बढ़ोतरी की मांग को लेकर चर्चा तेज हो गई है। शिक्षामित्रों का कहना है कि अनुभव और कार्यक्षमता को देखते हुए उन्हें दो साल अतिरिक्त सेवा का अवसर मिलना चाहिए।
फैसला हुआ तो हजारों को मिलेगा लाभ
यदि सरकार सेवा अवधि 60 से बढ़ाकर 62 वर्ष करती है, तो इसका लाभ बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को मिल सकता है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से भी सहारा मिलेगा और शिक्षा व्यवस्था में अनुभवी कर्मचारियों की भूमिका बनी रहेगी। फिलहाल शासन स्तर पर प्रक्रिया जारी है और विभिन्न जिलों से रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।

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