CM सम्राट ने दिए निर्देश, बिहार के 3 जिलों के लिए बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में सिंचाई और जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जल संसाधन विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं, जिनका सीधा लाभ बांका, भागलपुर और मुंगेर जिलों के किसानों को मिलने की संभावना है। 

इस योजना का मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के जल को संरक्षित कर जलाशयों में संग्रहित करना और खेती के लिए पर्याप्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा के कारण राज्य के कई जलाशयों में पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है, जिससे कृषि कार्यों पर भी असर पड़ा है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए यह नई योजना तैयार की गई है।

गंगा जल से भरे जाएंगे प्रमुख जलाशय

मुख्यमंत्री के निर्देश के अनुसार, सुल्तानगंज के पास गंगा नदी के जल को बाढ़ अवधि (जुलाई से अक्टूबर) के दौरान उद्वह कर बदुआ जलाशय और खड़गपुर जलाशय में संग्रहित किया जाएगा। इस पहल से जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम करने की कोशिश की जा रही है और सिंचाई व्यवस्था को मजबूत बनाने पर जोर दिया गया है।

इन तीन जिलों को मिलेगा बड़ा लाभ

इस योजना के लागू होने से बांका, भागलपुर और मुंगेर जिलों में बड़े पैमाने पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी। बदुआ जलाशय के माध्यम से करीब 45,850 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी। जबकि खड़गपुर जलाशय से मुंगेर जिले के लगभग 5,310 हेक्टेयर क्षेत्र को लाभ मिलेगा। वहीं, फुल्लीडूमर, मध्यागिरि और बिलासी जलाशयों से बांका जिले के 4,204 हेक्टेयर क्षेत्र में शत-प्रतिशत सिंचाई सुविधा सुनिश्चित की जाएगी

जलाशयों की क्षमता में आई कमी बनी चिंता का कारण

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन और अनियमित बारिश के कारण बदुआ जलाशय और खड़गपुर जलाशय की जल भंडारण क्षमता में क्रमशः 39.78 प्रतिशत और 69.59 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके चलते इन जलाशयों से तय लक्ष्य के मुकाबले काफी कम क्षेत्र में ही सिंचाई हो पा रही है, जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित हो रहा है।

इस समस्या के समाधान के लिए गंगा जल उद्वह योजना का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत बिजीखोरवा सिंचाई कॉलोनी में निर्माणाधीन डिटेंशन टैंक से तीन मोटर पंपों की मदद से गंगा जल उठाकर जलाशयों में भरा जाएगा। इस परियोजना में लगभग 15.02 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी को पाइपलाइन के माध्यम से विभिन्न जलाशयों तक पहुंचाने की योजना है।

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