हाई स्पीड श्रेणी में शामिल हुईं ये प्रमुख ट्रेनें
नए आदेश के तहत वंदे भारत, राजधानी, शताब्दी, दुरंतो और तेजस जैसी प्रीमियम ट्रेनों के साथ-साथ प्रयागराज एक्सप्रेस, महाबोधि एक्सप्रेस, शिवगंगा एक्सप्रेस और श्रमशक्ति एक्सप्रेस जैसी कई लोकप्रिय ट्रेनों को भी इस सूची में जगह दी गई है। पहले ये ट्रेनें तेज गति से चलने के बावजूद तकनीकी रूप से हाई स्पीड श्रेणी में नहीं आती थीं, जिसके कारण रनिंग स्टाफ को अतिरिक्त भत्ते का लाभ नहीं मिल पाता था।
कर्मचारियों को स्पेशल हाई स्पीड भत्ता
रेलवे के इस नए निर्णय के बाद अब इन ट्रेनों पर काम करने वाले कर्मचारियों को विशेष हाई स्पीड भत्ता दिया जाएगा। इससे उनके मासिक वेतन में लगभग 5 हजार से 10 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसके साथ ही लोको पायलटों की माइलेज दर में भी बदलाव किया गया है। पहले जो दर प्रति 100 किलोमीटर 485 रुपये थी, उसे बढ़ाकर 606 रुपये कर दिया गया है। वहीं, गार्ड (ट्रेन मैनेजर) के लिए यह दर 439 रुपये से बढ़ाकर 549 रुपये कर दी गई है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार 130 से 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार पर ट्रेन चलाना काफी चुनौतीपूर्ण काम होता है। इसमें अत्यधिक ध्यान और जिम्मेदारी की आवश्यकता होती है। ऐसे में यह भत्ता कर्मचारियों की मेहनत और उनकी कार्यक्षमता का सम्मान माना जा रहा है।
कर्मचारियों में खुशी का माहौल
इस फैसले के बाद रेलवे के रनिंग स्टाफ में खुशी की लहर है। उनका मानना है कि लंबे समय से इस तरह के भत्ते की मांग की जा रही थी, जो अब जाकर पूरी हुई है। भारतीय रेलवे का यह कदम न केवल कर्मचारियों के लिए आर्थिक राहत लेकर आया है, बल्कि इससे उनके मनोबल में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
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