सीएम सम्राट के 5 बड़े फैसले, बिहारवासियों को मिली 5 बड़ी खुशखबरी

पटना। बिहार में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई अहम फैसले लिए हैं। शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के बाद सरकार ने ऐसी योजनाओं का ऐलान किया है, जिनसे छात्रों, शिक्षकों और महिलाओं को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का कहना है कि आने वाले वर्षों में राज्य के हर बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना प्राथमिकता होगी।

1 .बिहार में 1 लाख शिक्षकों की होगी भर्ती

राज्य सरकार ने अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति करने का बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत हर वर्ष करीब 20 हजार शिक्षकों की बहाली की जाएगी। सरकार की योजना है कि हर साल जुलाई महीने में भर्ती का विज्ञापन जारी किया जाए, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया समय पर पूरी हो सके। इससे युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और स्कूलों में शिक्षकों की कमी भी दूर होगी।

2 .तबादला नीति होगी आसान-पारदर्शी

बैठक में शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। मुख्यमंत्री ने नई तबादला नीति तैयार करने के निर्देश दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत महिला शिक्षकों को उनके गृह जिले के नजदीक तैनाती देने की कोशिश होगी, जबकि पुरुष शिक्षकों को गृह प्रखंड के आसपास पोस्टिंग दी जाएगी। इससे शिक्षकों को पारिवारिक और सामाजिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

3 .जीविका समूहों को मिलेगा बड़ा मौका

सरकार ने राज्य के सभी विद्यालयों में छात्रों की पोशाक की आपूर्ति जीविका समूहों के माध्यम से कराने का फैसला लिया है। इससे स्कूलों में समय पर ड्रेस उपलब्ध कराई जा सकेगी। साथ ही जीविका से जुड़ी महिलाओं को रोजगार और आय बढ़ाने का अवसर मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे महिला सशक्तिकरण को भी मजबूती मिलेगी।

4 .शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर जोर

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए लगातार निगरानी की जाए। आधुनिक शिक्षा व्यवस्था, बेहतर संसाधन और शिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। सरकार चाहती है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे भी बेहतर शिक्षा प्राप्त कर आगे बढ़ सकें।

5 .छात्रों को मिलेगी बेहतर सुविधा

बैठक में छात्रों को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। स्कूलों में जरूरी संसाधन, साफ-सफाई, पोशाक और पढ़ाई के बेहतर माहौल को लेकर सरकार गंभीर नजर आई। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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