सरकार ने समीक्षा बैठकों में जिलाधिकारी, अंचलाधिकारी, भूमि सुधार उप समाहर्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी भी अनिवार्य की गई है। इससे यह साफ संकेत मिल रहा है कि सरकार जमीन और राजस्व मामलों में लापरवाही नहीं चाहती।
1. दाखिल-खारिज और परिमार्जन में तेजी
राज्य में सबसे ज्यादा शिकायतें दाखिल-खारिज और जमीन रिकॉर्ड सुधार को लेकर आती रही हैं। कई लोगों को छोटे-छोटे काम के लिए महीनों तक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। अब सरकार ने इन मामलों की सीधे समीक्षा करने का फैसला लिया है। लंबित आवेदनों, ऑनलाइन प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतों और रिकॉर्ड सुधार की स्थिति पर विशेष नजर रखी जाएगी। इससे जमीन मालिकों को अपने कागजात जल्दी अपडेट कराने में मदद मिल सकती है।
2. इ-मापी और डिजिटाइजेशन से बढ़ेगी पारदर्शिता
सरकार जमीन रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल बनाने पर जोर दे रही है। समीक्षा के दौरान इ-मापी कार्यों और डिजिटाइज जमाबंदी की प्रगति की भी जांच होगी। यदि यह प्रक्रिया तेजी से पूरी होती है, तो लोगों को जमीन मापी और रिकॉर्ड सत्यापन के लिए कम परेशानी होगी। साथ ही फर्जीवाड़े और विवादों में भी कमी आने की उम्मीद है।
3. अतिक्रमण और शिकायतों पर होगी सख्ती
सरकारी जमीन पर कब्जा, जन शिकायत पोर्टल पर लंबित मामले और राजस्व महाअभियान से जुड़े मामलों की भी जांच की जाएगी। सरकार चाहती है कि जमीन विवादों को जल्द निपटाया जाए और लोगों को समय पर न्याय मिल सके। इसके अलावा सहयोग शिविरों में प्राप्त आवेदनों की स्थिति भी देखी जाएगी, जिससे आम लोगों की शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई हो सके।
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