इसका उद्देश्य छात्रों को केवल किताबी ज्ञान तक सीमित न रखकर उन्हें कौशल आधारित शिक्षा देना है, ताकि वे भविष्य में रोजगार और स्वरोजगार के लिए तैयार हो सकें। यह कदम प्रदेश के लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी राहत और अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरे चरण में 1701 स्कूल होंगे शामिल
सरकारी योजना के दूसरे चरण के तहत 1701 विद्यालयों को इस कार्यक्रम से जोड़ा जाएगा। इनमें 971 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालय और शेष राजकीय माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं। इस विस्तार के बाद व्यावसायिक शिक्षा देने वाले स्कूलों की संख्या बढ़कर कुल 2554 हो जाएगी। पहले से ही 853 राजकीय विद्यालयों में यह कार्यक्रम संचालित हो रहा है।
17 ट्रेड में मिलेगा प्रशिक्षण
कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 17 अलग-अलग व्यावसायिक ट्रेड निर्धारित किए गए हैं। छात्र अपनी रुचि के अनुसार इनमें से किसी एक ट्रेड को वैकल्पिक विषय के रूप में चुन सकेंगे। इन ट्रेडों में प्रमुख रूप से शामिल हैं, कृषि, अपैरल डिजाइनिंग, ऑटोमोटिव, ब्यूटी एंड वेलनेस, कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, आईटी, लॉजिस्टिक्स, फूड प्रोसेसिंग, रिटेल। इन सभी क्षेत्रों में छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षकों की होगी तैनाती
इस योजना के प्रभावी संचालन के लिए सरकार ने 1605 व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति पहले ही कर दी है। जरूरत पड़ने पर आगे और प्रशिक्षकों की तैनाती की जाएगी। छात्रों को प्रशिक्षित शिक्षक और उद्योग विशेषज्ञों की मदद से व्यावहारिक ज्ञान और स्किल ट्रेनिंग दी जाएगी, जिससे वे पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार के लिए भी सक्षम बन सकें।
जुलाई से नई व्यवस्था लागू
जानकारी के अनुसार यह नई व्यवस्था जुलाई महीने से लागू की जाएगी। इसके बाद चयनित विद्यालयों में छात्रों को नियमित पाठ्यक्रम के साथ-साथ व्यावसायिक शिक्षा का भी लाभ मिलेगा। इससे छात्रों को पढ़ाई के दौरान ही करियर विकल्पों की बेहतर समझ विकसित होगी और वे अपने भविष्य की दिशा तय कर सकेंगे।

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