विशेषज्ञों का मानना है कि इस अतिरिक्त राशि से सरकार को विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे और पूंजीगत खर्च को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। साथ ही साथ इससे सरकार को राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखने में भी सहूलियत मिल सकती है।
सरकार को कैसे मिलेगा फायदा?
केंद्र सरकार पर इस समय कई बड़े खर्चों का दबाव है। इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, कल्याणकारी योजनाएं और आर्थिक विकास को गति देने के लिए लगातार बड़े निवेश की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में आरबीआई से मिलने वाला यह अधिशेष सरकार के लिए अतिरिक्त राजस्व का काम करेगा। इस राशि से सरकार की कर्ज पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है और बजट प्रबंधन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा।
लगातार बढ़ रहा है अधिशेष ट्रांसफर
पिछले कुछ वर्षों में रिजर्व बैंक द्वारा सरकार को दिए जाने वाले अधिशेष में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है। इससे पहले भी आरबीआई ने बड़े स्तर पर राशि ट्रांसफर की थी, लेकिन इस बार का आंकड़ा सबसे अधिक बताया जा रहा है। आर्थिक जानकारों के अनुसार, यह आरबीआई की मजबूत आय, विदेशी मुद्रा प्रबंधन और संतुलित जोखिम नीति का संकेत माना जा रहा है।
क्या होता है अधिशेष ट्रांसफर?
आरबीआई अपनी आय का एक हिस्सा विभिन्न जोखिमों और आपात स्थितियों के लिए सुरक्षित रखता है। इसे जोखिम बफर कहा जाता है। इसके बाद बची हुई राशि केंद्र सरकार को अधिशेष के रूप में दी जाती है। केंद्रीय बैंक की आय मुख्य रूप से सरकारी बॉन्ड, विदेशी निवेश और बैंकिंग संचालन से आती है। जब आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर बचता है, तब वह राशि सरकार को ट्रांसफर की जाती है।
अर्थव्यवस्था पर क्या पड़ेगा असर?
जानकारों का कहना है कि इस रिकॉर्ड ट्रांसफर से सरकार को वित्तीय योजनाओं को तेजी से लागू करने में मदद मिलेगी। सड़क, रेलवे, ऊर्जा और अन्य विकास परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा यदि सरकार इस राशि का सही उपयोग करती है, तो इससे आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है और रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।

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