केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, कर्मचारियों के लिए नया अपडेट

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों से जुड़ी स्वास्थ्य योजना CGHS को लेकर नया स्पष्टीकरण जारी किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के ताजा आदेश के बाद अब कर्मचारियों को अपने माता-पिता और सास-ससुर में से किसी एक पक्ष को ही आश्रित के रूप में चुनना होगा। इस फैसले ने लाखों कर्मचारियों के सामने नई चिंता खड़ी कर दी है, क्योंकि कई परिवारों में दोनों पक्षों के बुजुर्गों की जिम्मेदारी एक साथ निभाई जाती है।

अब करना होगा एक विकल्प का चयन

नए नियम के अनुसार यदि कोई कर्मचारी अपने माता-पिता को CGHS के तहत आश्रित घोषित करता है, तो वह अपने सास-ससुर को इस सुविधा में शामिल नहीं कर सकेगा। वहीं यदि किसी ने सास-ससुर को चुना है, तो उसके माता-पिता योजना के दायरे से बाहर हो जाएंगे। सरकार ने साफ किया है कि यह फैसला एक बार लेने के बाद स्थायी माना जाएगा। यानी बाद में परिस्थितियां बदलने पर भी दूसरा विकल्प चुनने की अनुमति नहीं होगी।

‘वन टाइम’ फैसले को लेकर बढ़ी परेशानी

कई कर्मचारी ऐसे हैं जो अपने माता-पिता और सास-ससुर दोनों की देखभाल कर रहे हैं। ऐसे में सिर्फ एक पक्ष को चुनना उनके लिए भावनात्मक और व्यावहारिक दोनों स्तर पर मुश्किल माना जा रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पारिवारिक हालात समय के साथ बदलते रहते हैं। बीमारी, आर्थिक निर्भरता, विधवा होने या किसी सदस्य के निधन जैसी परिस्थितियों में भविष्य की जरूरतें भी बदल सकती हैं।

कौन ले सकता है CGHS का लाभ

CGHS के तहत आश्रित घोषित किए जाने के लिए कुछ शर्तें भी तय की गई हैं। संबंधित सदस्य की मासिक आय तय सीमा से कम होनी चाहिए और वह कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर होना चाहिए। इस योजना में पति या पत्नी, अविवाहित या निर्धारित आयु तक के बच्चे, माता-पिता या सास-ससुर में से एक पक्ष, नाबालिग भाई-बहन और कुछ विशेष परिस्थितियों में विधवा बहन या बेटी को शामिल किया जा सकता है।

कर्मचारियों की सैलरी से कटती है फीस

CGHS सुविधा के लिए कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने तय राशि काटी जाती है। यह राशि वेतन स्तर के अनुसार अलग-अलग होती है। उच्च वेतन पाने वाले कर्मचारियों को ज्यादा योगदान देना पड़ता है। सरकार का कहना है कि यह योजना कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बनाई गई है, लेकिन नए नियम के बाद इसकी व्यवहारिकता को लेकर बहस तेज हो गई है।

पेंशनभोगियों के लिए भी लागू नियम

रिटायर्ड कर्मचारियों को भी CGHS सुविधा मिलती है। जो लोग ऐसे शहरों में रहते हैं जहां CGHS की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वे फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस लेने या नजदीकी CGHS शहर में रजिस्ट्रेशन कराने का विकल्प चुन सकते हैं।

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