ब्रिक्स देशों ने बनाई नई रणनीति
गुजरात के गांधीनगर में आयोजित ब्रिक्स देशों की अहम बैठक में सदस्य देशों ने आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया। इस दौरान मजबूत सप्लाई चेन, स्थानीय व्यापार और नए आर्थिक अवसरों को लेकर व्यापक चर्चा हुई। बैठक में भारत ने प्रमुख भूमिका निभाते हुए सदस्य देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में कई सुझाव दिए। उद्देश्य यह है कि ब्रिक्स देश बाहरी आर्थिक दबावों और टैरिफ प्रतिबंधों का मिलकर सामना कर सकें।
तेजी से बढ़ा ब्रिक्स देशों का व्यापार
बैठक में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार में पिछले दो दशकों में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। वर्ष 2003 में जहां सदस्य देशों के बीच व्यापार 84 अरब डॉलर के आसपास था, वहीं अब यह कई गुना बढ़ चुका है। हालांकि इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों की हिस्सेदारी अभी भी सीमित मानी जा रही है। यही वजह है कि अब सदस्य देश आपसी आर्थिक सहयोग को और अधिक मजबूत करने पर फोकस कर रहे हैं।
पश्चिमी दबाव कम करने की तैयारी
ब्रिक्स समूह अब केवल राजनीतिक मंच नहीं रह गया है, बल्कि यह तेजी से एक मजबूत आर्थिक गठबंधन के रूप में उभर रहा है। भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देशों के साथ अब सऊदी अरब, ईरान और यूएई जैसे ऊर्जा संपन्न देश भी इसमें शामिल हो चुके हैं। यदि ये देश आपसी व्यापार को स्थानीय मुद्रा और मजबूत सप्लाई नेटवर्क के जरिए बढ़ाते हैं तो डॉलर पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे पश्चिमी देशों की आर्थिक नीतियों का असर भी सीमित किया जा सकेगा।
सर्विस सेक्टर और नए बाजारों पर फोकस
बैठक में सिर्फ वस्तुओं के व्यापार ही नहीं, बल्कि सेवा क्षेत्र में भी नए अवसर तलाशने पर जोर दिया गया। सदस्य देशों ने टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स, डिजिटल सेवाओं और निवेश सहयोग जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की बात कही। इसके साथ ही व्यापार संतुलन सुधारने और एक-दूसरे के बाजारों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने पर भी सहमति बनी।
इस समय भारत की तेजी से बढ़ती वैश्विक भूमिका
भारत इस समय ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है और वह इस मंच को मजबूत आर्थिक साझेदारी की दिशा में आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। जानकारों के मुताबिक, भारत की रणनीति केवल व्यापार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक आर्थिक व्यवस्था में अपनी मजबूत भूमिका स्थापित करना भी इसका बड़ा लक्ष्य है। आने वाले समय में यदि ब्रिक्स देशों की यह रणनीति सफल होती है, तो दुनिया के व्यापारिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
.png)
0 comments:
Post a Comment