दो सरकारी निगमों को मिली बड़ी जिम्मेदारी
इलेक्ट्रिक वाहनों की व्यवस्था और संचालन के लिए बिहार राज्य पथ परिवहन निगम और बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम को नोडल एजेंसी बनाया गया है। ये दोनों संस्थाएं एग्रीगेटर के रूप में काम करेंगी और वाहन निर्माता कंपनियों के साथ समन्वय स्थापित कर सरकारी विभागों को जरूरत के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन उपलब्ध कराएंगी। सरकार ने पहले चरण में दो से तीन हजार इलेक्ट्रिक वाहनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा है।
उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया फैसला
यह निर्णय विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, वाहन निर्माता कंपनियों और पेट्रोलियम कंपनियों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान टाटा मोटर्स, एमजी मोटर, हुंडई, मारुति सुजुकी और टीवीएस जैसी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। बैठक में बिहार इलेक्ट्रिक वाहन संशोधन नीति 2026 के प्रावधानों पर विस्तार से चर्चा हुई।
सरकारी जरूरतों के अनुसार तैयार होंगे वाहन
सरकार ने वाहन कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे इलेक्ट्रिक वाहन विकसित करें जो बोलेरो, स्कॉर्पियो-एन और आर्टिगा जैसी श्रेणी के मजबूत और लंबी दूरी तय करने वाले वाहनों का विकल्प बन सकें। सरकारी कामकाज में लगातार यात्रा और कठिन रास्तों का सामना करना पड़ता है, इसलिए सरकार चाहती है कि इलेक्ट्रिक वाहन केवल पर्यावरण के लिहाज से ही नहीं बल्कि उपयोग और सुरक्षा के लिहाज से भी बेहतर साबित हों।
इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पूरे राज्य में बनेंगे चार्जिंग स्टेशन
इलेक्ट्रिक वाहनों के सफल संचालन के लिए मजबूत चार्जिंग नेटवर्क तैयार करने पर भी सरकार का विशेष फोकस है। बैठक में निर्देश दिया गया कि सरकारी परिसरों, सार्वजनिक स्थानों और प्रमुख इलाकों में बड़े पैमाने पर ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाए जाएं। इसके अलावा पेट्रोलियम कंपनियों को भी अपने पेट्रोल पंपों पर अनिवार्य रूप से ईवी चार्जर लगाने के लिए कहा गया है।
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