दक्षिण बिहार को मिलेगा सीधा फायदा
यह एक्सप्रेसवे खासतौर पर दक्षिण बिहार के जिलों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और गया जैसे क्षेत्रों से बड़े शहरों तक पहुंच पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी। बेहतर सड़क नेटवर्क बनने से यात्रियों के साथ-साथ कारोबारियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर को भी बड़ी राहत मिलेगी। नई सड़क परियोजना के चलते इन जिलों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
आधे समय में पूरा होगा लंबा सफर
अभी वाराणसी से कोलकाता तक सड़क मार्ग से यात्रा करने में लगभग 12 से 14 घंटे का समय लगता है। लेकिन एक्सप्रेसवे बनने के बाद यही दूरी करीब 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे माल ढुलाई तेज होगी और ट्रांसपोर्ट लागत में कमी आएगी।
कई राज्यों को जोड़ेगा कॉरिडोर
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के वाराणसी क्षेत्र से शुरू होकर बिहार के कई हिस्सों से गुजरेगा। इसके बाद यह झारखंड और पश्चिम बंगाल को जोड़ते हुए कोलकाता तक पहुंचेगा। बिहार के बाद यह मार्ग झारखंड के महत्वपूर्ण औद्योगिक इलाकों से होकर निकलेगा, जिससे पूरे पूर्वी भारत में परिवहन नेटवर्क मजबूत होगा। पश्चिम बंगाल के प्रमुख शहरों तक सीधी कनेक्टिविटी मिलने से व्यापारिक गतिविधियों में भी तेजी आने की उम्मीद है।
पर्यावरण को ध्यान में रखकर होगा निर्माण
परियोजना के कुछ हिस्सों में पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया के कारण काम धीमा पड़ा था। अब जरूरी स्वीकृतियां मिलने के बाद निर्माण कार्य में तेजी आने की संभावना है। सरकार की ओर से जंगल और वन्यजीव क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है ताकि प्राकृतिक संतुलन प्रभावित न हो। वन्यजीवों की आवाजाही को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा।
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