सरकार का उद्देश्य है कि गांवों में महिलाओं की भागीदारी बढ़े और गोशालाएं आत्मनिर्भरता एवं रोजगार का मजबूत केंद्र बन सकें। इस योजना को उत्तर प्रदेश आजीविका मिशन से जुड़ी महिलाओं के सहयोग से आगे बढ़ाया जाएगा।
महिलाओं को मिलेगा नया रोजगार अवसर
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत महिलाओं की भागीदारी है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें कृषि सखी के रूप में तैयार किया जाएगा। ये महिलाएं गांव स्तर पर किसानों और गोशाला संचालकों को आधुनिक और उपयोगी जानकारी देंगी। प्रदेश स्तर पर कुछ महिलाओं को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा, जो आगे अन्य महिलाओं को प्रशिक्षित करेंगी। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया अवसर मिलने की उम्मीद है।
जैविक खेती को मिलेगा बढ़ावा
सरकार गो आधारित उत्पादों और जैविक खेती को भी इस योजना से जोड़ना चाहती है। गोबर से जैविक खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने और पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
ग्रामीण विकास पर फोकस
योगी सरकार लगातार ग्रामीण विकास और महिला सशक्तीकरण को लेकर नई योजनाएं लागू कर रही है। कृषि सखी योजना को भी इसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि महिलाएं सिर्फ स्वयं सहायता समूहों तक सीमित न रहें, बल्कि खेती और पशुपालन आधारित अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा बनें। अगर यह योजना प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो आने वाले समय में उत्तर प्रदेश में गोशालाएं सिर्फ पशु आश्रय केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और रोजगार के बड़े केंद्र के रूप में उभर सकती हैं।

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