स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 13 मई, 2026 को जारी किए गए इस नए निर्देश के बाद CGHS के आश्रितों को लेकर नियम और स्पष्ट कर दिए गए हैं।
क्या बदला है नया नियम?
नए प्रावधान के अनुसार अब केंद्र सरकार के कर्मचारी एक साथ अपने माता-पिता और सास-ससुर दोनों को CGHS लाभार्थी के रूप में शामिल नहीं कर पाएंगे। कर्मचारी को अब इनमें से केवल एक विकल्प चुनना होगा या तो अपने माता-पिता को CGHS में शामिल करें या फिर सास-ससुर को आश्रित के रूप में चुनें। एक बार किया गया यह चयन भविष्य में बदला नहीं जा सकेगा, जिससे यह निर्णय और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।
‘वन-टाइम चयन’ से बढ़ी मुश्किल
नए नियम की सबसे बड़ी बात यह है कि यह चयन स्थायी माना जाएगा। यानी एक बार जो निर्णय लिया गया, वही अंतिम होगा। यदि चुने गए आश्रितों में से किसी का निधन हो जाता है, तो भी दूसरे विकल्प को शामिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। यही वजह है कि इसे लेकर कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
कौन-कौन हो सकते हैं CGHS के आश्रित?
CGHS नियमों के तहत कुछ विशेष शर्तों के साथ परिवार के सदस्य लाभार्थी बन सकते हैं। सामान्य तौर पर इनमें शामिल हैं पति या पत्नी, बच्चे (निर्धारित आयु सीमा तक), माता-पिता या सास-ससुर (इनमें से केवल एक पक्ष), आश्रित भाई-बहन या अन्य पात्र परिजन। इसके अलावा यह भी जरूरी है कि आश्रित व्यक्ति कर्मचारी के साथ रहता हो और उसकी आय एक निर्धारित सीमा से कम हो।
कर्मचारियों की सैलरी से कितनी कटौती होती है?
CGHS सुविधा के लिए कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने एक निश्चित राशि काटी जाती है, जो उनके वेतन स्तर पर निर्भर करती है। लेवल 1 से 5 तक ₹250 प्रति माह, लेवल 6 वालों से ₹450 प्रति माह, लेवल 7 से 11 तक ₹650 प्रति माह, जबकि लेवल 12 और उससे ऊपर से ₹1,000 प्रति माह। यह राशि स्वास्थ्य सुविधाओं के संचालन और उपचार व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उपयोग की जाती है।
रिटायर्ड कर्मचारियों के लिए भी यह नियम है लागू
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को भी CGHS सुविधा का लाभ मिलता है। जिन शहरों में CGHS केंद्र उपलब्ध नहीं हैं, वहां पेंशनर्स को दो विकल्प दिए जाते हैं। फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस (FMA) लेना या नजदीकी CGHS केंद्र में रजिस्ट्रेशन कराना।

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