कर्मचारियों के लिए खुशखबरी? 6% इंक्रीमेंट और OPS बहाली की मांग ने पकड़ी रफ्तार

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनर्स की नजर इस समय 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई है। आयोग को लेकर लगातार बैठकों और चर्चाओं का दौर जारी है। इसी बीच कर्मचारियों के प्रतिनिधि संगठन नेशनल काउंसिल (जेसीएम स्टाफ साइड) ने सरकार के सामने कई बड़ी मांगें रख दी हैं, जिससे लाखों कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

न्यूनतम सैलरी बढ़ाने की मांग

नेशनल काउंसिल ने अपने मेमोरेंडम में कहा है कि कर्मचारियों के लिए फिटमेंट फैक्टर 3.83 तय किया जाए। अगर ऐसा होता है तो केंद्रीय कर्मचारियों की न्यूनतम बेसिक सैलरी बढ़कर लगभग 69 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। संगठन का तर्क है कि वर्तमान वेतन ढांचा कई साल पुरानी आर्थिक परिस्थितियों के हिसाब से तैयार किया गया था, जबकि अब महंगाई और खर्च दोनों तेजी से बढ़ चुके हैं। ऐसे में कर्मचारियों को बेहतर वेतन मिलना जरूरी है।

6 प्रतिशत इंक्रीमेंट की मांग

कर्मचारी संगठनों ने वार्षिक वेतन वृद्धि दर को भी बढ़ाने की मांग की है। मौजूदा व्यवस्था के मुकाबले 6 प्रतिशत इंक्रीमेंट लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है। उनका मानना है कि इससे कर्मचारियों की आय में स्थिर वृद्धि बनी रहेगी और महंगाई का असर कम होगा।

पेंशनर्स के लिए भी कई प्रस्ताव

नेशनल काउंसिल ने सिर्फ मौजूदा कर्मचारियों ही नहीं, बल्कि पेंशनर्स के लिए भी कई अहम सुझाव दिए हैं। इसमें हर पांच साल में पेंशन रिव्यू, कम्यूटेड पेंशन की बहाली और मेडिकल सुविधा में सुधार जैसी मांगें शामिल हैं। इसके अलावा पेंशनर्स के लिए मेडिकल भत्ता बढ़ाकर 3 हजार रुपये प्रतिमाह करने और हर जिले में CGHS हेल्थ सेंटर खोलने का प्रस्ताव भी रखा गया है।

पुरानी पेंशन योजना पर फिर जोर

सबसे बड़ी मांगों में से एक पुरानी पेंशन योजना यानी OPS की बहाली भी है। नेशनल काउंसिल ने कहा है कि 1 जनवरी 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों को भी पुरानी पेंशन योजना का लाभ मिलना चाहिए। कर्मचारी संगठन लंबे समय से न्यू पेंशन स्कीम को लेकर चिंता जाहिर करते रहे हैं। उनका कहना है कि OPS में कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक सुरक्षा और स्थिर आय मिलती थी।

प्रमोशन और भत्तों पर भी फोकस

मेमोरेंडम में प्रमोशन नीति को लेकर भी कई सुझाव दिए गए हैं। कर्मचारियों की मांग है कि 30 साल की नौकरी के दौरान कम से कम पांच प्रमोशन सुनिश्चित किए जाएं। इसके अलावा मौजूदा 18 पे-लेवल को घटाकर सरल ढांचे में लाने का सुझाव भी दिया गया है। हाउस रेंट अलाउंस यानी HRA को लेकर भी बड़ी मांग सामने आई है। कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि HRA को महंगाई भत्ते के साथ जोड़कर 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जाए।

सरकार के फैसले पर टिकी निगाहें

सरकार ने संकेत दिए हैं कि कर्मचारियों और पेंशनर्स से जुड़ी मांगों को 8वें वेतन आयोग के समक्ष रखा जाएगा। हालांकि अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों और केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद ही होगा। फिलहाल, लगातार बढ़ती मांगों और बैठकों के बीच केंद्रीय कर्मचारियों को उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग उनके वेतन, भत्तों और पेंशन व्यवस्था में बड़े बदलाव लेकर आ सकता है।

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