बिहार में 'अधिकारियों और कर्मचारियों' को नया फरमान, निर्देश जारी

पटना। बिहार सरकार ने राज्य के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी सेवकों को बदलते समय और नई पीढ़ी की चुनौतियों को समझने के लिए विशेष प्रशिक्षण लेना होगा। सरकार ने प्रशासनिक कार्यों को अधिक प्रभावी और आधुनिक बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत बिहार प्रशासनिक सेवा, सचिवालय सेवा और सचिवालय लिपिकीय सेवा से जुड़े अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए हर साल प्रशिक्षण लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

साल में 52 घंटे की ट्रेनिंग जरूरी

सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को हर वर्ष कम से कम 52 घंटे का प्रशिक्षण पूरा करना होगा। यह प्रशिक्षण ऑनलाइन माध्यम से ‘कर्मयोगी पोर्टल’ के जरिए दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य अधिकारियों की कार्यकुशलता बढ़ाना और उन्हें आधुनिक प्रशासनिक जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है। इसके लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम में कई नए और महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।

जेन जी की चुनौतियों पर भी होगा फोकस

इस बार प्रशिक्षण कार्यक्रम में नई पीढ़ी यानी जेन जी से जुड़ी चुनौतियों और व्यवहार को भी पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। बदलते सामाजिक और डिजिटल माहौल में युवाओं की सोच, अपेक्षाएं और कार्यशैली को समझने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि नई पीढ़ी के साथ बेहतर संवाद और समन्वय के लिए अधिकारियों को समय के अनुसार खुद को अपडेट करना जरूरी है।

इन अधिकारियों-कर्मचारियों पर लागू होंगे नियम

यह प्रशिक्षण बिहार प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों से लेकर सचिवालय सेवा और लिपिकीय सेवा के कर्मचारियों तक लागू होगा। इसके तहत संयुक्त सचिव से लेकर विशेष सचिव स्तर तक के अधिकारी, अपर समाहर्ता स्तर के पदाधिकारी, सचिवालय सेवा के उप सचिव से सचिव स्तर तक के अधिकारी तथा उच्च एवं निम्न वर्गीय लिपिकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होना होगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में केवल तकनीकी जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि अधिकारियों की नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान रहेगा। इसके अलावा आम जनता के साथ बेहतर व्यवहार, संवाद कौशल, प्रशासनिक दक्षता और कार्य संस्कृति सुधार जैसे विषय भी पाठ्यक्रम में शामिल किए गए हैं।

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