क्यों बढ़ सकता है भू-लगान?
सरकार का मानना है कि वर्तमान समय में भूमि से जुड़े रिकॉर्ड, डिजिटल सेवाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत है। इसी को देखते हुए भू-लगान की दरों में संशोधन पर विचार किया जा रहा है। हालांकि अभी नई दरों का आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है, लेकिन सरकार के संकेतों से साफ है कि आने वाले समय में जमीन मालिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ सकता है।
लंबित आवेदनों के निपटारे पर जोर
बैठक में मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लगान राजस्व महाअभियान के दौरान प्राप्त सभी आवेदनों का जल्द निष्पादन किया जाए। अब तक लगभग 81 प्रतिशत आवेदनों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है। सरकार ने 31 मई तक सभी आवेदनों को डिजिटल रूप से अपलोड करने का लक्ष्य रखा है। सरकार का उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है ताकि लोगों को बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
6.60 लाख जमाबंदियों में होगा सुधार
राज्य में चल रहे एग्रिस्टैक अभियान के तहत सरकार ने 6.60 लाख जमाबंदियों में सुधार का लक्ष्य तय किया है। मंत्री ने कहा कि जमाबंदी सुधार कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि इसके पूरा होने के बाद ही किसान रजिस्ट्री अभियान में तेजी आ सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भूमि रिकॉर्ड सही और अपडेट होंगे तो किसानों को सरकारी योजनाओं और बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।
मापी के हजारों मामले अब भी लंबित
बैठक में यह भी सामने आया कि हड़ताल की वजह से जमीन मापी के करीब 48 हजार मामले लंबित हो गए हैं। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि सभी लंबित मामलों का निपटारा 30 जून तक किया जाए। भूमि विवाद और मापी से जुड़े मामलों के लंबित रहने से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सरकार इस प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दे रही है।
तेजी से हो रहा रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि अब तक करीब 33 करोड़ पन्नों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जा चुका है। यह बिहार में भूमि रिकॉर्ड के डिजिटलीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सरकार चाहती है कि आने वाले समय में जमीन से जुड़े अधिकतर कार्य ऑनलाइन माध्यम से ही पूरे किए जा सकें।

0 comments:
Post a Comment