3 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला फायदा
राज्य सरकार के मुताबिक बाढ़ प्रभावित जिलों में नए मॉडल के जरिए करीब 40.72 लाख हेक्टेयर भूमि को सुरक्षित किया गया है। इससे 3 करोड़ से अधिक लोगों को राहत मिली है। सरकार अब इस मॉडल को और ज्यादा जिलों में लागू करने की तैयारी कर रही है ताकि हर साल आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
नदियों से निकाली गई भारी मात्रा में गाद
बाढ़ नियंत्रण विभाग ने इंजीनियरों के साथ मिलकर घाघरा, शारदा और सुहेली जैसी नदियों के कई हिस्सों में गाद निकालने का अभियान चलाया। करीब 9 से 16 किलोमीटर तक नदी मार्ग की सफाई कर उनकी जल वहन क्षमता बढ़ाई गई। इससे मानसून के दौरान पानी का दबाव कम होगा और आसपास के गांवों को राहत मिल सकेगी।
किसानों को होगा सीधा फायदा
सरकार का कहना है कि नए मॉडल से हर साल मिट्टी के बांध और तटबंध बनाने के लिए कृषि भूमि के अधिग्रहण की जरूरत कम पड़ेगी। इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा। पहले कई इलाकों में बाढ़ नियंत्रण कार्यों के कारण किसानों की जमीन प्रभावित होती थी, लेकिन अब वैकल्पिक मॉडल अपनाने से इस समस्या को कम करने की कोशिश की जा रही है।
ड्रोन और सेंसर से होगी निगरानी
सरकार वर्ष 2026 से बाढ़ नियंत्रण के लिए ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी व्यवस्था शुरू करने की तैयारी कर रही है। उच्च जोखिम वाले नदी क्षेत्रों की लगातार मॉनिटरिंग की जाएगी ताकि समय रहते खतरे की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
8 साल में पूरी हुईं 1665 परियोजनाएं
सरकार के अनुसार पिछले 8 वर्षों में प्रदेश में 1665 से अधिक बाढ़ नियंत्रण परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इसके अलावा 60 से ज्यादा नदियों से गाद निकालने और कई नई नहरों के निर्माण का काम भी किया गया है। सरकार का उद्देश्य पुराने और महंगे मॉडलों पर निर्भरता कम कर आधुनिक और कम खर्च वाले समाधान अपनाना है, ताकि बाढ़ से होने वाले नुकसान को स्थायी रूप से कम किया जा सके।

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