क्या होता है फिटमेंट फैक्टर?
फिटमेंट फैक्टर वह फॉर्मूला होता है जिसके आधार पर कर्मचारियों की नई बेसिक सैलरी तय की जाती है। 7वें वेतन आयोग में 2.57 फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था। अब कर्मचारी संगठन इसे बढ़ाकर 3.83 करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई, शहरों का खर्च और जीवनयापन की लागत को देखते हुए मौजूदा वेतन संरचना पर्याप्त नहीं रह गई है।
न्यूनतम बेसिक सैलरी में बड़ा उछाल संभव
अगर 3.83 फिटमेंट फैक्टर लागू होता है, तो मौजूदा 18 हजार रुपये की न्यूनतम बेसिक पे बढ़कर करीब 68,940 रुपये तक पहुंच सकती है। यही वजह है कि केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के बीच इसको लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
लेवल-1 से लेवल-18 तक संभावित नई सैलरी
लेवल-1: 18,000 रुपये से बढ़कर लगभग 69,000 रुपये
लेवल-2: 19,900 रुपये से बढ़कर लगभग 76,000 रुपये
लेवल-3: 21,700 रुपये से बढ़कर लगभग 83,000 रुपये
लेवल-4: 25,500 रुपये से बढ़कर लगभग 97,000 रुपये
लेवल-5: 29,200 रुपये से बढ़कर लगभग 1.11 लाख रुपये
लेवल-6: 35,400 रुपये से बढ़कर लगभग 1.35 लाख रुपये
लेवल-7: 44,900 रुपये से बढ़कर लगभग 1.72 लाख रुपये
लेवल-8: 47,600 रुपये से बढ़कर लगभग 1.82 लाख रुपये
लेवल-9: 53,100 रुपये से बढ़कर लगभग 2.03 लाख रुपये
लेवल-13: 1.23 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 4.71 लाख रुपये
लेवल-14: 1.44 lakh रुपये से बढ़कर लगभग 5.52 लाख रुपये
लेवल-15: 1.82 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 6.97 लाख रुपये
लेवल-18: 2.50 लाख रुपये से बढ़कर लगभग 9.57 लाख रुपये
अभी अंतिम फैसला नहीं
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि फिलहाल यह सिर्फ कर्मचारी संगठनों की मांग और अनुमानित गणना है। सरकार ने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है। वेतन आयोग को आर्थिक स्थिति, सरकारी खर्च और वित्तीय दबाव जैसे कई पहलुओं का अध्ययन करने के बाद अपनी सिफारिशें देनी होंगी।

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