यूपी सरकार का बड़ा फैसला, सभी 75 जिलों में होंगे लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्यभर में न्यायिक व्यवस्था को तेज और प्रभावी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्य सचिव एसपी गोयल ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 9 मई को प्रदेश के सभी 75 जिलों में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन का उद्देश्य पुराने और लंबित मामलों का तेजी से निस्तारण करना है।

लोक अदालत में पुराने मामलों पर रहेगा ज्यादा फोकस

मुख्य सचिव ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक पुराने मामलों की पहचान कर उनका निपटारा किया जाए। इसके लिए सभी विभागों को अपने स्तर पर नोडल अधिकारी नामित करने होंगे, ताकि प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके। बैंकों के साथ समन्वय कर रिकवरी से जुड़े मामलों का समाधान करने पर भी विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा लोगों को इस व्यवस्था की जानकारी देने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक तकनीक का उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।

वाहन चालान और बिजली मामलों का भी निपटारा

लोक अदालत में ट्रैफिक चालानों और बिजली विभाग से जुड़े कंपाउंडिंग मामलों को भी शामिल किया जाएगा। 21 दिसंबर 2021 के बाद के वाहन चालानों को अदालत में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इस कदम से लाखों लंबित मामलों के निपटारे की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे न्याय व्यवस्था पर दबाव कम होगा।

नोटिस और जनजागरूकता पर जोर

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सभी पक्षकारों को समय पर नोटिस और समन की तामील सुनिश्चित की जाए। साथ ही आशा बहुओं और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को भी इस प्रक्रिया में शामिल कर जनजागरूकता बढ़ाने की बात कही गई है।

किसान पंजीकरण पर भी सख्ती

लोक अदालत के निर्देशों के अलावा मुख्य सचिव ने किसानों के पंजीकरण अभियान की भी समीक्षा की। उन्होंने कहा कि राज्य में शत-प्रतिशत फार्मर रजिस्ट्री सुनिश्चित की जाए। अब तक लगभग 77 प्रतिशत किसानों का पंजीकरण पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

विकास योजनाओं की समीक्षा

बैठक में खनन पट्टों की लंबित धनराशि, ईंट भट्ठा शुल्क वसूली और तालाब संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। सभी जिलों को समयबद्ध तरीके से बकाया राशि जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा हेलीपैड निर्माण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण विकास कार्यों को भी प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।

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