मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस प्रस्तावित कॉरिडोर में नाथ परंपरा से जुड़े मंदिर, मठ, गुफाएं और ध्यान स्थलों को आपस में जोड़ा जाएगा। इसका मुख्य केंद्र गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर होगा, जिसे गोरक्षपीठ का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
गोरखपुर बनेगा आध्यात्मिक केंद्र
गुरु गोरखनाथ को नाथ परंपरा का प्रमुख संत और संस्थापक माना जाता है। उनके अनुयायी उत्तर प्रदेश के अलावा बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, तमिलनाडु और नेपाल तक फैले हुए हैं। ऐसे में सरकार इस धार्मिक धारा को पर्यटन से जोड़कर एक बड़ा आध्यात्मिक मार्ग तैयार करना चाहती है।
कई जिलों को जोड़ेगा कॉरिडोर
प्रस्तावित गुरु गोरखनाथ कॉरिडोर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों को जोड़ने का काम करेगा। इसमें महोबा, चित्रकूट, बरेली, अमेठी, अयोध्या, बलरामपुर और गोरखपुर जैसे जिले शामिल होंगे। सरकार का उद्देश्य इन स्थलों को बेहतर सड़क, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था, ध्यान केंद्र और पर्यटक सुविधाओं से जोड़कर एक व्यवस्थित धार्मिक पर्यटन क्षेत्र के रूप में विकसित करना है।
महोबा में विकसित हो रहा ध्यान केंद्र
महोबा स्थित गोरखगिरि पर्वत, जिसे नाथ साधना का प्रमुख स्थान माना जाता है, वहां विकास कार्य तेजी से चल रहे हैं। स्वदेश दर्शन योजना के तहत यहां करोड़ों रुपये की लागत से ध्यान केंद्र, पर्यटक सुविधाएं और स्वच्छता व्यवस्था विकसित की जा रही है। सरकार इसे आध्यात्मिक पर्यटन के साथ पर्यावरण अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में भी स्थापित करना चाहती है।
बरेली के मंदिरों का होगा जीर्णोद्धार
बरेली में नाथ संप्रदाय से जुड़े कई प्राचीन मंदिरों के विकास का काम शुरू हो चुका है। इनमें अलखनाथ मंदिर, त्रिवती नाथ मंदिर, तुलसी मठ और पशुपतिनाथ मंदिर प्रमुख हैं। इन मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं, सौंदर्यीकरण और आधारभूत ढांचे को मजबूत किया जाएगा।
अमेठी में बनेगी विशाल प्रतिमा
अमेठी में गुरु गोरखनाथ की 25 फुट ऊंची कांस्य प्रतिमा का निर्माण भी कराया जा रहा है। इसे योग मुद्रा में स्थापित किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए धनराशि जारी कर दी है और निर्माण कार्य भी शुरू हो चुका है। माना जा रहा है कि यह प्रतिमा परिसर भविष्य में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र बनेगा।
चित्रकूट और बलरामपुर भी होंगे शामिल
चित्रकूट में गोरखनाथ गुफा और पालेश्वरनाथ मंदिर क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। वहीं नेपाल सीमा के पास स्थित बलरामपुर का देवी पाटन मंदिर भी इस सर्किट का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। नाथ परंपरा और नेपाल से जुड़े धार्मिक संबंधों को देखते हुए यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।

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