सऊदी-कुवैत का बड़ा फैसला, ट्रंप खुश! ईरान की बढ़ी टेंशन?

न्यूज डेस्क। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब और कुवैत ने ऐसा फैसला लिया है, जिसने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। दोनों देशों ने अमेरिकी सेना को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकानों के इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। माना जा रहा है कि इस फैसले से अमेरिका को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने मिशन को फिर से मजबूत करने में बड़ी मदद मिलेगी।

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर सीधे पड़ सकता है। इसी वजह से अमेरिका लंबे समय से इस क्षेत्र में व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अभियान चला रहा है।

फिर शुरू हो सकता है ‘ऑपरेशन फ्रीडम’

अमेरिका ने व्यावसायिक जहाजों की सुरक्षा के लिए 'ऑपरेशन फ्रीडम' नाम से मिशन शुरू किया था, लेकिन शुरुआती दौर में कुछ रणनीतिक अड़चनों के कारण इसे रोकना पड़ा। अब सऊदी अरब और कुवैत द्वारा एयरस्पेस और एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति मिलने के बाद पेंटागन इस मिशन को दोबारा शुरू करने की तैयारी में जुट गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसेना और एयरफोर्स जल्द ही क्षेत्र में अपनी गतिविधियां बढ़ा सकती हैं।

अमेरिका के लिए क्यों जरूरी है यह सहयोग?

जानकारों के मुताबिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए अमेरिका को बड़े हवाई और नौसैनिक नेटवर्क की जरूरत होती है। इसके लिए खाड़ी देशों के एयरबेस और एयरस्पेस बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। सऊदी अरब और कुवैत की मंजूरी मिलने से अमेरिकी लड़ाकू विमान और निगरानी सिस्टम तेजी से ऑपरेशन चला सकेंगे। इससे व्यापारिक जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों से सुरक्षा देने में मदद मिलेगी।

सऊदी-कुवैत के फैसले से ट्रंप प्रशासन को राहत

डोनाल्ड ट्रंप लगातार खाड़ी देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की कोशिश कर रहे थे। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के बीच कई स्तर पर बातचीत हुई थी। इन चर्चाओं के बाद दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग को लेकर बनी दूरी कम हुई और अब अमेरिका को फिर से रणनीतिक समर्थन मिलने लगा है।

वहीं, अमेरिका की बढ़ती सैन्य गतिविधियां ईरान पर दबाव बढ़ा सकती हैं। अगर 'ऑपरेशन फ्रीडम' पूरी ताकत के साथ दोबारा शुरू होता है, तो खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

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