मंत्रिमंडल में सबसे अधिक प्रतिनिधित्व अति पिछड़ा वर्ग (EBC) को मिला है। कुल 9 मंत्री इस वर्ग से बनाए गए हैं, जिससे यह साफ संकेत गया है कि सरकार बिहार के सबसे बड़े सामाजिक समूहों में शामिल EBC वोट बैंक को साधने की रणनीति पर काम कर रही है। वहीं OBC और दलित समुदाय से 7-7 नेताओं को जगह देकर सामाजिक संतुलन कायम रखने की कोशिश की गई है।
महिलाओं को भी मिला अहम स्थान
नई कैबिनेट में पांच महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है। इनमें तीन चेहरे जदयू से और दो भाजपा से हैं। यह कदम महिला प्रतिनिधित्व बढ़ाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। सरकार ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि राजनीतिक भागीदारी में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
राजपूत समुदाय की मजबूत मौजूदगी
जातीय समीकरणों में राजपूत समाज का प्रतिनिधित्व सबसे अधिक नजर आया। इस समुदाय से चार नेताओं को मंत्री पद मिला है। इसके अलावा भूमिहार, ब्राह्मण, वैश्य, दलित, मुस्लिम और यादव समुदाय को भी प्रतिनिधित्व देकर सभी प्रमुख सामाजिक वर्गों को साधने का प्रयास किया गया है। वैश्य समाज से कई प्रमुख नेताओं को मौका दिया गया, जबकि मुस्लिम समाज से एकमात्र चेहरे के रूप में जमा खान को दोबारा मंत्री बनाया गया। यादव समुदाय की ओर से रामकृपाल यादव को कैबिनेट में शामिल किया गया है।
सहयोगी दलों को भी मिला सम्मान
एनडीए के सहयोगी दलों को भी मंत्रिमंडल में पर्याप्त भागीदारी दी गई। भाजपा के खाते में 15 मंत्री गए, जबकि जदयू को 13 स्थान मिले। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा को भी प्रतिनिधित्व मिला। इससे गठबंधन के भीतर संतुलन बनाए रखने की कोशिश स्पष्ट दिखाई दी।

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