विदेशी निवेश आकर्षित करने की रणनीति
सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में विदेशी पूंजी के प्रवाह को बढ़ाना और भारतीय बॉन्ड बाजार को अधिक आकर्षक बनाना है। इसी दिशा में यह निर्णय लिया गया है कि विदेशी निवेशकों को सरकारी प्रतिभूतियों से होने वाली आय पर कैपिटल गेन्स टैक्स से छूट दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारतीय वित्तीय बाजार को वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ाएगा।
मौजूदा टैक्स ढांचे में बड़ा बदलाव
वर्तमान नियमों के अनुसार विदेशी निवेशकों को लंबे समय तक रखे गए बॉन्ड्स और शेयरों पर 12.5 प्रतिशत तक लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स देना होता है। इसके अलावा सरकारी बॉन्ड्स से मिलने वाले ब्याज पर 20 प्रतिशत तक विदहोल्डिंग टैक्स भी लागू है। पहले दी जाने वाली कुछ टैक्स रियायतों को भी पिछले वर्षों में समाप्त कर दिया गया था, जिससे विदेशी निवेशकों पर बोझ बढ़ गया था। नए फैसले के बाद यह बोझ काफी हद तक कम हो जाएगा।
विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद
हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं और टैक्स संरचना के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से भारी मात्रा में पूंजी निकाली है। अनुमान के अनुसार, अरबों रुपये की बिकवाली देखी गई है, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा। सरकार को उम्मीद है कि इस नए टैक्स सुधार के बाद विदेशी निवेशक फिर से भारतीय बॉन्ड मार्केट की ओर रुख करेंगे।
रुपये और बाजार पर सकारात्मक असर
जानकारों का मानना है कि विदेशी पूंजी के बढ़ने से भारतीय रुपये को मजबूती मिल सकती है और शेयर तथा बॉन्ड बाजार में स्थिरता आएगी। इससे देश की आर्थिक स्थिति को भी समर्थन मिलेगा। सरकार का यह कदम व्यापक आर्थिक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य निवेश माहौल को बेहतर बनाना और विकास दर को बनाए रखना है।

0 comments:
Post a Comment