उम्र बढ़ने पर बढ़े पेंशन का प्रस्ताव
पेंशनर्स संगठनों का कहना है कि उम्र बढ़ने के साथ स्वास्थ्य खर्च, देखभाल और दैनिक जरूरतों पर होने वाला व्यय भी बढ़ जाता है। ऐसे में वरिष्ठ नागरिकों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलनी चाहिए। इसी सोच के तहत आयु-आधारित पेंशन व्यवस्था का सुझाव दिया गया है। प्रस्ताव के अनुसार 65 वर्ष की आयु पर पेंशन को अंतिम वेतन के 70 प्रतिशत तक, 70 वर्ष पर 75 प्रतिशत, 75 वर्ष पर 80 प्रतिशत और 80 वर्ष की आयु के बाद क्रमशः बढ़ाया जाए। सबसे महत्वपूर्ण मांग यह है कि 90 वर्ष या उससे अधिक आयु के पेंशनर्स को उनकी अंतिम सैलरी के बराबर यानी 100 प्रतिशत पेंशन मिले।
न्यूनतम पेंशन बढ़ाने की भी मांग
पेंशनर्स संगठनों का मानना है कि मौजूदा समय में कई सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन बढ़ती महंगाई के मुकाबले पर्याप्त नहीं है। इसलिए न्यूनतम पेंशन की सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा गया है। मांग है कि पेंशन को अंतिम वेतन के कम से कम 67 प्रतिशत के स्तर तक लाया जाए ताकि रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
महंगाई राहत और फिटमेंट फैक्टर पर भी जोर
पेंशन गणना में उपयोग होने वाले फिटमेंट फैक्टर की समीक्षा की मांग भी उठाई गई है। संगठनों का कहना है कि यदि फिटमेंट फैक्टर में सुधार किया जाता है तो पेंशन निर्धारण अधिक व्यावहारिक और लाभकारी हो सकता है। इसके साथ ही महंगाई राहत (डीआर) व्यवस्था को भी अधिक प्रभावी बनाने की मांग की गई है ताकि बढ़ती कीमतों का असर पेंशनर्स की आय पर कम पड़े।
फैमिली पेंशन को मजबूत बनाने की भी पहल
कर्मचारी संगठनों ने फैमिली पेंशन के दायरे को बढ़ाने की भी पैरवी की है। उनका तर्क है कि कर्मचारी के निधन के बाद परिवार को पर्याप्त वित्तीय सुरक्षा मिलनी चाहिए। इसलिए फैमिली पेंशन से जुड़े नियमों को अधिक उदार और लाभकारी बनाने की आवश्यकता है।
फिलहाल यह सभी प्रस्ताव कर्मचारी और पेंशनर्स संगठनों की ओर से रखी गई मांगें हैं। सरकार या 8वें वेतन आयोग की ओर से इन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि इन सुझावों पर चर्चा शुरू होने से पेंशनभोगियों के बीच उम्मीद जरूर बढ़ी है कि भविष्य में उनकी आर्थिक सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए बड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

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