1. 14 से 16 जून तक लगेगा कृषि मेला और आरोग्य मेला
प्रदेश के सभी जिलों में 14 से 16 जून के बीच कृषि मेला और आरोग्य मेला आयोजित किया जाएगा। इन मेलों में किसानों को आधुनिक खेती की तकनीक, सरकारी योजनाओं और बेहतर उत्पादन के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही किसानों के स्वास्थ्य से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे उन्हें एक ही स्थान पर कई लाभ मिल सकें।
2. प्राकृतिक खेती को मिलेगा बढ़ावा
17 से 18 जून तक प्राकृतिक खेती पर विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी। इस कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रसायन मुक्त खेती की ओर प्रेरित करना है। विशेषज्ञ किसानों को जैविक खेती के तरीके, मिट्टी की गुणवत्ता सुधार और कम लागत में अधिक उत्पादन के उपाय बताएंगे। सरकार का मानना है कि इससे खेती टिकाऊ और लाभकारी बन सकेगी।
3. दलहन और तिलहन पर जोर
सरकार इस साल दलहन और तिलहन फसलों जैसे मूंग, उड़द, सोयाबीन और तिल की खेती को बढ़ावा दे रही है। कम पानी में उगने वाली इन फसलों से किसानों को बेहतर आय मिल सकती है। कृषि विभाग का फोकस खेती के पैटर्न में बदलाव लाकर किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है।
4. सह-फसली खेती से लाभ
सरकार के द्वारा गन्ना आधारित क्षेत्रों में सह-फसली खेती को बढ़ावा देने का फैसला लिया गया है। इसके तहत किसान गन्ने के साथ मूंग, उड़द, मूंगफली, सरसों और भिंडी जैसी फसलें उगा सकेंगे। इससे किसानों की आय के नए स्रोत बनेंगे और भूमि का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
मौसम को देखते हुए सरकार की सलाह
संभावित अल नीनो और कम बारिश की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार ने किसानों को खेतों की मेड़ों पर वृक्षारोपण करने और जल संरक्षण पर ध्यान देने की सलाह दी है। इससे न केवल पर्यावरण संतुलन बना रहेगा बल्कि किसानों को अतिरिक्त लाभ भी मिल सकता है।

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