पूरे वित्त वर्ष में बेहतर रही आर्थिक रफ्तार
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की GDP वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत रही। यह पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की 7.1 प्रतिशत वृद्धि दर से बेहतर प्रदर्शन है। लगातार मजबूत आर्थिक गतिविधियों, निवेश और घरेलू मांग के चलते देश की विकास दर सकारात्मक बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था का यह प्रदर्शन दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले काफी बेहतर माना जा सकता है।
अर्थव्यवस्था का आकार 323 लाख करोड़ रुपये से अधिक
स्थिर कीमतों के आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 में देश की GDP का आकार बढ़कर लगभग 323.12 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। एक वर्ष पहले यह आंकड़ा करीब 299.89 लाख करोड़ रुपये था। वहीं मौजूदा कीमतों पर अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 346.36 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 318.07 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 8.9 प्रतिशत अधिक है। यह दर्शाता है कि देश की आर्थिक गतिविधियों में निरंतर विस्तार हो रहा है।
नई GDP सीरीज से मिलेगी अर्थव्यवस्था की बेहतर तस्वीर
भारत ने हाल ही में GDP गणना के लिए नई सीरीज अपनाई है, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य डिजिटल अर्थव्यवस्था, बदलती उपभोक्ता आदतों और महामारी के बाद के आर्थिक ढांचे को अधिक सटीक रूप से आंकड़ों में शामिल करना है। नई प्रणाली के तहत जारी आंकड़े अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति को अधिक स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने में मदद करेंगे।
दुनिया की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल भारत
मार्च तिमाही में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि और पूरे वित्त वर्ष में 7.7 प्रतिशत की आर्थिक रफ्तार यह संकेत देती है कि भारत वैश्विक चुनौतियों के बावजूद विकास के रास्ते पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। बढ़ता आर्थिक आकार, मजबूत उपभोग और निवेश गतिविधियां आने वाले समय में भी भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

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