श्रम विभाग द्वारा तैयार इस ड्राफ्ट को वित्त विभाग की मंजूरी भी मिल चुकी है और अब इसे अंतिम स्वीकृति के लिए राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि महिलाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलें, लेकिन उनकी सुरक्षा और सम्मान के साथ कोई समझौता न हो।
रात में काम कराने के लिए होगी महिला की सहमति जरूरी
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, किसी भी कंपनी, कार्यालय या औद्योगिक इकाई को रात 7 बजे से सुबह 6 बजे के बीच महिला कर्मचारी से काम लेने से पहले उसकी लिखित सहमति प्राप्त करनी होगी। बिना अनुमति किसी महिला को नाइट शिफ्ट में तैनात नहीं किया जा सकेगा। इसके अलावा, कार्यस्थल पर महिलाओं के खिलाफ उत्पीड़न रोकने से जुड़े सभी कानूनी प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
सीसीटीवी और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष जोर
नए नियमों में कंपनियों को कार्यस्थल और उसके आसपास पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही पूरे परिसर को सीसीटीवी निगरानी के दायरे में रखना होगा। सरकार ने यह भी प्रस्तावित किया है कि सीसीटीवी फुटेज को कम से कम 45 दिनों तक सुरक्षित रखा जाए, ताकि किसी भी शिकायत या जांच की स्थिति में उसका उपयोग किया जा सके।
दो महिलाओं की मौजूदगी होगी जरूरी
महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए रात की शिफ्ट में अकेली महिला कर्मचारी से काम नहीं लिया जा सकेगा। नियमों के अनुसार, कम से कम दो महिला कर्मचारियों की एक साथ मौजूदगी सुनिश्चित करनी होगी। इस प्रावधान का उद्देश्य कार्यस्थल पर सुरक्षा और आत्मविश्वास का माहौल बनाना है।
गर्भवती महिलाओं को मिलेगी सुरक्षा
सरकार ने महिला कर्मचारियों के स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता दी है। प्रस्तावित नियमों के तहत गर्भावस्था के दौरान महिलाओं को नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए नहीं लगाया जाएगा। यह कदम मातृत्व सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
आने-जाने की सुविधा भी होगी अनिवार्य
रात में काम करने वाली महिलाओं के लिए सुरक्षित परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना भी कंपनियों की जिम्मेदारी होगी। कर्मचारियों को लाने और ले जाने वाली गाड़ियों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा, महिलाओं के लिए अलग शौचालय, स्वच्छ पेयजल, वॉशरूम और आवश्यकता पड़ने पर चेंजिंग रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी होंगी।

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