मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षकों के अनुभव और उनके योगदान को ध्यान में रखने की मांग रखी। इस पर मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा और उनकी सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
टीईटी विवाद पर समाधान की दिशा में पहल
टीईटी अनिवार्यता को लेकर कई शिक्षकों की नौकरी पर संकट की स्थिति बनी हुई है। इसी मुद्दे को लेकर प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष सेवा अवधि के आधार पर वेटेज देने और विशेष व्यवस्था के तहत समाधान निकालने का सुझाव रखा। साथ ही यह भी मांग की गई कि प्रभावित शिक्षकों के लिए अलग से विभागीय परीक्षा या वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए, ताकि उनकी सेवाएं सुरक्षित रह सकें।
कैशलेस चिकित्सा योजना पर जताया आभार
शिक्षक प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात के दौरान शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों और रसोइयों के लिए शुरू की गई कैशलेस चिकित्सा योजना के लिए मुख्यमंत्री का आभार भी व्यक्त किया। इसे शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
कोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी चिंता
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद कई शिक्षकों के भविष्य को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी। ऐसे में प्रतिनिधिमंडल ने इस मुद्दे को सरकार के सामने रखते हुए जल्द समाधान की मांग की। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार पहले ही इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर चुकी है और शिक्षकों के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयासरत है।
तदर्थ शिक्षकों के मुद्दे पर भी चर्चा
बैठक में वर्ष 2000 के बाद नियुक्त तदर्थ शिक्षकों के मामले पर भी चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने सुझाव दिया कि ऐसे शिक्षकों को उनके वर्तमान पदों पर बनाए रखने के लिए नीति में आवश्यक संशोधन किया जाए, ताकि उनकी सेवा बाधित न हो।
सकारात्मक माहौल में हुई बातचीत
मुलाकात में शामिल एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि बैठक का माहौल पूरी तरह सकारात्मक रहा। सरकार शिक्षकों की समस्याओं को गंभीरता से सुन रही है और जल्द ही उचित समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा सकते हैं।

0 comments:
Post a Comment