बढ़ते आवेदनों के बीच सरकार की नई पहल
राज्य में भूमि मापी से जुड़े आवेदनों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कई जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित होने के कारण लोगों को निर्धारित समय सीमा से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए विभाग ने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने का निर्णय लिया है।
नई व्यवस्था के तहत उन अंचलों की पहचान की जाएगी जहां ई-मापी के आवेदन कम हैं और वहां कार्यरत अमीनों को जरूरत पड़ने पर उन क्षेत्रों में भेजा जाएगा जहां आवेदनों का दबाव अधिक है। इससे कार्यभार का संतुलन बनेगा और लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी।
सरकारी अमीनों की तैनाती से बढ़ेगी रफ्तार
विभाग का मानना है कि अमीनों की डेपुटेशन व्यवस्था लागू होने से अधिक आवेदन वाले क्षेत्रों में मापी कार्य तेजी से पूरा किया जा सकेगा। इससे न केवल लंबित मामलों की संख्या घटेगी बल्कि नए आवेदनों का भी समय पर निपटारा संभव हो सकेगा। जमीन मापी अक्सर भूमि विवादों, रजिस्ट्री, बंटवारे और अन्य राजस्व मामलों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए इस प्रक्रिया में तेजी आने से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
प्रशिक्षित अमीनों की नियुक्ति
सरकार केवल मौजूदा कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। बढ़ते कार्यभार को देखते हुए प्रशिक्षित अमीनों की अतिरिक्त नियुक्ति की भी योजना बनाई जा रही है। इसके लिए आउटसोर्सिंग के माध्यम से योग्य और प्रशिक्षित कर्मियों को जोड़े जाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस कदम से विभाग को अतिरिक्त मानव संसाधन मिलेगा और ई-मापी के कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा करने में मदद मिलेगी।
हजारों मामले हैं लंबित
जानकारी के अनुसार, राज्य में ई-मापी से जुड़े करीब 45 हजार आवेदन अभी भी लंबित हैं। कई आवेदक महीनों से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। विभाग अब इन मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाने की दिशा में काम कर रहा है ताकि लोगों को समय पर सेवा मिल सके।
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