रजिस्ट्री होते ही विभागों तक पहुंचेगी जानकारी
नई व्यवस्था के तहत किसी भी संपत्ति की रजिस्ट्री पूरी होते ही संबंधित विलेख की डिजिटल कॉपी स्वतः संबंधित विभागों के पोर्टल पर उपलब्ध हो जाएगी। इससे नामांतरण (म्यूटेशन) की प्रक्रिया में तेजी आएगी और लोगों को बार-बार दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
पैन और आधार की जानकारी होगी अनिवार्य
रियल एस्टेट लेन-देन में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए अब रजिस्ट्री के दौरान पैन और आधार से संबंधित जानकारी देना जरूरी किया जा रहा है। इससे बड़ी संपत्तियों की खरीद-बिक्री में सही पहचान सुनिश्चित होगी और संदिग्ध लेन-देन पर नजर रखना आसान होगा।
स्वामित्व सत्यापन के बाद ही होगी रजिस्ट्री
नई प्रणाली में संपत्ति के स्वामित्व का डिजिटल सत्यापन महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। प्रस्ताव है कि जमीन या मकान का मालिकाना हक सत्यापित होने के बाद ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया आगे बढ़े। इससे फर्जी दस्तावेजों और विवादित संपत्तियों की बिक्री पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।
हर भूखंड को मिलेगी यूनिक प्रॉपर्टी आईडी
सरकार नक्शा परियोजना के तहत प्रत्येक भूखंड को एक विशेष यूनिक प्रॉपर्टी आईडी से जोड़ने की दिशा में भी काम कर रही है। इस व्यवस्था के लागू होने के बाद किसी भी जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन आसानी से ट्रैक किया जा सकेगा। यूनिक आईडी से जुड़े रिकॉर्ड के कारण एक ही संपत्ति को कई लोगों को बेचने या गलत जानकारी देकर सौदा करने जैसी घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।
गवाहों और पक्षकारों की उपस्थिति होगी जरूरी
रजिस्ट्री प्रक्रिया में धोखाधड़ी रोकने के लिए खरीदार, विक्रेता और गवाहों की उपस्थिति तथा उनके बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को भी अधिक सख्ती से लागू किया जा रहा है। दस्तावेजों पर आवश्यक हस्ताक्षर और पहचान सत्यापन पूरा होने के बाद ही पंजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके साथ ही ऑनलाइन आधार सत्यापन को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि रजिस्ट्री कार्यालयों में समय की बचत हो और प्रक्रिया अधिक सुगम बन सके।

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