यूपी सरकार की बड़ी तैयारी: ग्रामीण क्षेत्रों में होगी लागू

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण और विकास प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। पंचायती राज विभाग द्वारा प्रस्तावित नई भवन निर्माण उपविधि लागू होने के बाद जिला पंचायत क्षेत्रों में निर्माण से जुड़े नियमों में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। इसका सीधा लाभ ग्रामीण नागरिकों, छोटे निर्माणकर्ताओं और स्थानीय विकास कार्यों को मिलेगा।

छोटे भवनों के लिए नक्शा स्वीकृति की अनिवार्यता खत्म

नई व्यवस्था के तहत अब 250 वर्गमीटर तक के आवासीय और 60 वर्गमीटर तक के व्यावसायिक भवनों के निर्माण के लिए नक्शा स्वीकृत कराने की आवश्यकता नहीं होगी। केवल संबंधित प्राधिकरण को लिखित सूचना देना पर्याप्त होगा। इससे ग्रामीण स्तर पर निर्माण प्रक्रिया तेज होगी और लोगों को अनावश्यक दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

सड़क व्यवस्था के नियम होंगे अनिवार्य

प्रस्तावित उपविधि में भवन निर्माण के दौरान सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन पर विशेष ध्यान दिया गया है। आवासीय लेआउट में कम से कम 15 प्रतिशत खुला स्थान रखना अनिवार्य होगा, जबकि गैर-आवासीय भवनों में 10 प्रतिशत खुला स्थान जरूरी होगा। इसके साथ ही किसी भी आवासीय परियोजना में न्यूनतम 9 मीटर चौड़ी पहुंच सड़क होना अनिवार्य किया गया है।

छोटे निर्माण कार्यों को बड़ी राहत

नई नीति के तहत प्लास्टर, फ्लोरिंग, सनशेड, चहारदीवारी जैसे छोटे निर्माण कार्यों के लिए किसी प्रकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी। इसके अलावा होम स्टे और पेइंग गेस्ट हाउस जैसी सुविधाओं के लिए भी अलग से अनुमति प्रक्रिया समाप्त कर दी जाएगी। आवेदन प्रक्रिया को ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से उपलब्ध कराया जाएगा।

तेजी से होगा नक्शा अनुमोदन

सरकार ने भवन निर्माण अनुमोदन प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने पर जोर दिया है। अभिलेखों का परीक्षण एक सप्ताह में पूरा किया जाएगा, जबकि स्थल सर्वेक्षण और शुल्क निर्धारण 15 दिनों के भीतर होगा। तकनीकी जांच और अंतिम संस्तुति अधिकतम 6 दिनों में दी जाएगी। पूरी प्रक्रिया के बाद 30 दिनों के भीतर नक्शा स्वीकृति पर निर्णय लेना अनिवार्य होगा।

टाउनशिप विकास का प्रस्ताव

ग्रामीण क्षेत्रों में विकसित होने वाली टाउनशिप परियोजनाओं के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित करने का प्रस्ताव है। इसमें सभी आवश्यक नागरिक सुविधाओं जैसे सड़क, जल आपूर्ति, सीवरेज और अन्य आधारभूत ढांचे को अनिवार्य किया जाएगा। यह मॉडल शहरी और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

बदलेगा गांवों विकास का ढांचा

इस नई नीति का नाम 'उत्तर प्रदेश की जिला पंचायतों हेतु मॉडल भवन निर्माण एवं विकास उपविधियां-2026' प्रस्तावित किया गया है। पंचायती राज विभाग के अनुसार, इस मसौदे पर बिल्डर्स, आर्किटेक्ट्स और संबंधित अधिकारियों के साथ विस्तृत चर्चा की जाएगी। इसके बाद अंतिम रूप देकर इसे जल्द लागू किया जा सकता है।

0 comments:

Post a Comment