परिषद की ओर से सभी जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर आवेदन भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं। इस बार की स्थानांतरण नीति में कई महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं।
1. न्यूनतम सेवा अवधि की बाध्यता खत्म
इस बार सबसे बड़ी राहत यह है कि स्थानांतरण के लिए किसी न्यूनतम सेवा अवधि की शर्त नहीं रखी गई है। यानी पात्र शिक्षक अपनी सेवा अवधि की परवाह किए बिना आवेदन कर सकेंगे।
2. दिव्यांग शिक्षकों को मिलेगा प्राथमिक लाभ
यदि शिक्षक, शिक्षिका, उनके पति या पत्नी अथवा अविवाहित पुत्र-पुत्री 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता से ग्रसित हैं, तो वे स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा।
3. गंभीर बीमारी के मामलों में भी मौका
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी या डायलिसिस पर निर्भर शिक्षक, शिक्षिका अथवा उनके अविवाहित पुत्र-पुत्री भी तबादले के लिए पात्र होंगे। ऐसे मामलों में सरकारी अस्पताल का प्रमाणपत्र अनिवार्य होगा। यदि इलाज निजी अस्पताल में चल रहा है, तो संबंधित सरकारी अधिकारी का सत्यापन भी जरूरी होगा।
4. पति-पत्नी को साथ रहने का अवसर
यदि पति और पत्नी दोनों बेसिक शिक्षा विभाग के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हैं, तो उन्हें एक ही जिले में स्थानांतरण का अवसर मिल सकता है। इससे पारिवारिक जीवन और नौकरी के बीच संतुलन बनाने में आसानी होगी। हालांकि अंतिम निर्णय संबंधित जिले में शिक्षक-छात्र अनुपात को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
5. आवेदन पूरी तरह निर्धारित प्रारूप में
सभी आवेदन संबंधित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के माध्यम से ही भेजे जाएंगे। निर्धारित प्रारूप में आवेदन करने से प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और पारदर्शी बनेगी। समयसीमा के बाद प्राप्त आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
6. पदोन्नत शिक्षकों को भी मिला अवसर
ऐसे शिक्षक या शिक्षिकाएं जिन्हें पदोन्नति मिल चुकी है, वे भी स्थानांतरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि उन्हें उसी जिले के लिए आवेदन करना होगा जहां उनकी मूल नियुक्ति तिथि के आधार पर पदोन्नति की पात्रता बनती हो।
महत्वपूर्ण शर्तों का भी रखना होगा ध्यान
स्थानांतरण केवल ग्रामीण सेवा संवर्ग से ग्रामीण सेवा संवर्ग और नगर सेवा संवर्ग से नगर सेवा संवर्ग में ही किया जाएगा। केवल नियमित शिक्षक और शिक्षिकाएं ही आवेदन करने के पात्र होंगे। इसके अलावा स्थानांतरण पाने वाले शिक्षक को यह शपथपत्र देना होगा कि वह नए जिले की वरिष्ठता सूची में सबसे नीचे स्थान स्वीकार करेगा और भविष्य में वरिष्ठता या पदोन्नति को लेकर कोई दावा नहीं करेगा।

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