लंबित मामलों को कम करने पर सरकार का फोकस
राज्य के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में इ-मापी आवेदन लंबित पड़े हैं। कई लोगों को अपनी जमीन की मापी करवाने के लिए महीनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। ऐसे मामलों को देखते हुए विभाग ने लंबित आवेदनों के त्वरित समाधान के लिए विशेष योजना तैयार की है। जानकारी के अनुसार, राज्यभर में हजारों इ-मापी आवेदन अभी भी लंबित हैं। सरकार का लक्ष्य इन मामलों को जल्द से जल्द निपटाकर लोगों को राहत पहुंचाना है।
अमीनों की डेपुटेशन से बढ़ेगी काम की रफ्तार
नई व्यवस्था के तहत उन अंचलों की पहचान की जाएगी जहां इ-मापी के आवेदन कम हैं और जहां आवेदन अधिक संख्या में लंबित हैं। जिन क्षेत्रों में काम का दबाव कम है, वहां के सरकारी अमीनों को आवश्यकता के अनुसार अधिक आवेदन वाले अंचलों में प्रतिनियुक्ति (डेपुटेशन) पर भेजा जाएगा।
आउटसोर्सिंग के जरिए बढ़ेगी क्षमता
सरकार केवल मौजूदा कर्मचारियों पर निर्भर नहीं रहना चाहती। इसके लिए प्रशिक्षित अमीनों की सेवाएं आउटसोर्सिंग के माध्यम से लेने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है। इससे विभाग को अतिरिक्त तकनीकी सहयोग मिलेगा और मापी कार्यों को निर्धारित समय में पूरा करने में मदद मिलेगी।
जमीन विवादों के समाधान में मिलेगी मदद
इ-मापी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य जमीन की सही माप सुनिश्चित करना और भूमि विवादों को कम करना है। जब मापी समय पर होगी तो सीमांकन से जुड़े विवादों का समाधान भी तेजी से हो सकेगा। इससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के जमीन मालिकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

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