भारत की स्वतंत्र नीति का समर्थन
पुतिन ने कहा कि भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और वह अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर फैसले लेने में पूरी तरह सक्षम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि भारत अपनी विदेश नीति में किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करता। उनके अनुसार, भारत हमेशा वही विकल्प चुनता है जो उसके विकास और सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर होता है।
प्रतिबंधों को लेकर सख्त चेतावनी
रूसी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि भारत के खिलाफ लगाए जाने वाले किसी भी प्रकार के प्रतिबंध अंततः उल्टा असर डालेंगे। उनके मुताबिक, ऐसे कदम उन देशों के लिए ही नुकसानदायक साबित हो सकते हैं जो इन्हें लागू करने की कोशिश करेंगे। उन्होंने साफ संकेत दिया कि वैश्विक राजनीति में दबाव और प्रतिबंधों की नीति अब पहले जैसी प्रभावी नहीं रही है।
भारत-रूस संबंधों पर कोई असर नहीं
पुतिन ने स्पष्ट किया कि भारत और रूस के बीच सहयोग किसी भी राजनीतिक परिस्थिति पर निर्भर नहीं करता। दोनों देशों के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रहे हैं और आगे भी इसमें स्थिरता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि रूस, भारत जैसे भरोसेमंद साझेदारों के साथ अपने सहयोग को लगातार आगे बढ़ाता रहेगा और बाहरी दबाव का इस रिश्ते पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
डिजिटल अर्थव्यवस्था में भारत की भूमिका
पुतिन ने भारत की डिजिटल और आईटी क्षेत्र में बढ़ती ताकत की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत वैश्विक सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी मार्केट में एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बन चुका है। उनके अनुसार, भारत की तकनीकी क्षमता और डिजिटल विकास उसे भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था में और मजबूत स्थिति प्रदान कर रहा है।
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