सरकारी कर्मचारी और जनप्रतिनिधि योजना से बाहर
संशोधित दिशा-निर्देशों के अनुसार संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति, मंत्री, सांसद, विधायक, मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष अब NHB की संबंधित योजनाओं के तहत सब्सिडी नहीं ले सकेंगे। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों व विभागों में कार्यरत अधिकारी-कर्मचारियों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। 10 हजार रुपये या उससे अधिक मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त सरकारी कर्मचारियों को भी अब सब्सिडी का लाभ नहीं मिलेगा।
परिवार के सदस्य को मिल सकता है लाभ
हालांकि, नए नियमों में अयोग्य श्रेणी में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्यों के लिए कुछ गुंजाइश रखी गई है। यदि परिवार का सदस्य संशोधित पारिवारिक परिभाषा के तहत पात्र है, तो उसे योजना के तहत एक बार सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही सरकार ने एक परिवार को मिलने वाली सब्सिडी पर भी स्पष्ट सीमा तय कर दी है। परिवार के सिर्फ एक सदस्य को योजना का लाभ मिलेगा। किसी एक सदस्य द्वारा प्राप्त सब्सिडी को पूरे परिवार की सहायता माना जाएगा।
दोबारा सब्सिडी लेना होगा मुश्किल
अगर परिवार के किसी सदस्य को पहले ही योजना के तहत आर्थिक सहायता मिल चुकी है, तो भविष्य में उसी परिवार का दूसरा सदस्य इस लाभ के लिए पात्र नहीं होगा। यह नियम व्यक्तिगत लाभ के अलावा हिंदू अविभाजित परिवार, साझेदारी, प्रोप्राइटरशिप फर्म या कंपनी के निदेशक के माध्यम से लिए गए लाभ पर भी लागू होगा।
क्यों बदले गए नियम?
NHB ने 21 अगस्त को संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लागू किया गया है। बोर्ड के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य सरकारी आर्थिक सहायता का सही तरीके से वितरण करना, एक ही परिवार या लाभार्थी को बार-बार सब्सिडी मिलने की संभावना रोकना और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना है।
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